हिमाचल के सरकारी CBSE स्कूलों में अब नया सिलेबस, हिंदी के साथ अंग्रेजी माध्यम की किताबें भी मिलेंगी
शिमला: हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नौवीं कक्षा में नया सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा देशभर में नया सिलेबस लागू करने के बाद अब हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग भी इसे पूरी तरह लागू करने की तैयारी में जुट गया है।
प्रदेश स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी करते हुए नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों का संशोधित नामांकन जल्द भेजने को कहा है। इसी आधार पर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला को नई पुस्तकों की मांग भेजी जाएगी, ताकि समय रहते विद्यार्थियों को नए सिलेबस की किताबें उपलब्ध करवाई जा सकें।
प्रदेश सरकार ने अब तक 156 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने की मंजूरी दी है। इनमें से 145 स्कूलों को संबद्धता मिल चुकी है, जबकि 11 स्कूलों की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इन सभी स्कूलों में अब सीबीएसई और एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा।
सबसे अहम बात यह है कि सरकारी सीबीएसई स्कूलों में अब विद्यार्थियों को हिंदी माध्यम के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम की पाठ्यपुस्तकें भी उपलब्ध करवाई जाएंगी। शिक्षा विभाग ने यह फैसला निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ रहे रुझान को देखते हुए लिया है। हाल के महीनों में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों से हटाकर सरकारी सीबीएसई स्कूलों में करवाया है। इनमें अधिकांश छात्र पहले से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई कर चुके हैं, जिसके चलते सरकारी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम की किताबों की मांग लगातार बढ़ रही थी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की सुविधा मिलने से अब अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम होगा और विद्यार्थियों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। विभाग ने जिला उपनिदेशकों को निर्देश दिए हैं कि सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूलों में विद्यार्थियों का रिकॉर्ड जल्द उपलब्ध करवाया जाए, ताकि वास्तविक संख्या के अनुसार पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और किसी भी स्कूल में किताबों की कमी न रहे।
शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि पहले कई अभिभावक केवल अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई के कारण बच्चों को निजी स्कूलों में भेजते थे, लेकिन अब सरकारी स्कूलों में भी वही सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।






