हिमाचल का एंटी चिट्टा मॉडल बना मिसाल, अब दूसरे राज्यों में भी होगी स्टडी
हिमाचल का एंटी चिट्टा मॉडल बना मिसाल, NCB ने मांगी रिपोर्ट
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार का एंटी चिट्टा मॉडल अब देशभर में चर्चा का विषय बनता जा रहा है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के रीजनल ऑफिस ने इस मॉडल की विस्तृत रिपोर्ट हिमाचल सरकार से मांगी है, ताकि इसका अध्ययन कर अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सके। सरकार का दावा है कि इस मॉडल के जरिए न केवल चिट्टा तस्करों पर कड़ी कार्रवाई हुई है, बल्कि नशे के शिकार युवाओं के पुनर्वास पर भी प्रभावी काम किया जा रहा है।
प्रदेश में किए गए सर्वे के दौरान 234 पंचायतों में चिट्टे का प्रभाव सबसे अधिक पाया गया, जिन्हें रेड श्रेणी में रखा गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देश पर इन क्षेत्रों में पुलिस निगरानी बढ़ाई गई, जिसके बाद सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
राज्य सरकार ने PIT-NDPS एक्ट के तहत 174 अपराधियों को हिरासत में लिया है। इसके अलावा नशा तस्करों की 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां भी जब्त की गई हैं। 700 से अधिक मामलों की जांच के बाद करीब 300 मामलों को आर्थिक जांच और संपत्ति जब्ती के लिए उपयुक्त पाया गया।
सरकार नशा पीड़ितों के पुनर्वास पर भी विशेष फोकस कर रही है। सिरमौर के कोटला बड़ोग में नीति आयोग, एम्स दिल्ली और PGI चंडीगढ़ के सहयोग से आधुनिक पुनर्वास केंद्र बनाया जा रहा है। वहीं शिमला के मशोबरा और मेडिकल कॉलेज टांड़ा में भी जल्द पुनर्वास केंद्र शुरू किए जाएंगे।
युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए स्कूल और कॉलेजों में ड्रग फ्री कैंपस अभियान, एंटी ड्रग शपथ और एंटी ड्रग सेल स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार पंचायत चुनावों के बाद एंटी चिट्टा अभियान का दूसरा चरण शुरू करने की तैयारी में है, जिसे चिट्टा माफिया के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है।






