रेरा से मंजूर JDA परियोजनाओं की विजिलेंस जांच के आदेश, धारा 118 उल्लंघन की आशंका पर सरकार सख्त
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) से मंजूर संयुक्त विकास समझौता (जेडीए) परियोजनाओं की विजिलेंस जांच के आदेश जारी किए हैं। सरकार को आशंका है कि कुछ मामलों में हिमाचली कृषकों और गैर-कृषकों के बीच हुए भूमि समझौतों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 118 के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया हो सकता है।
इस संबंध में आवास विभाग का जिम्मा संभाल रहे मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से राज्य विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक को पत्र जारी किया गया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि विभाग ने कई बार हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) से संबंधित जानकारी और दस्तावेज मांगे, लेकिन बार-बार अनुरोध और रिमाइंडर भेजने के बावजूद जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाए गए।
सरकार ने विजिलेंस ब्यूरो को निर्देश दिए हैं कि रेरा से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड तत्काल कब्जे में लेकर जांच शुरू की जाए। विशेष तौर पर तीन अहम बिंदुओं पर जानकारी जुटाने को कहा गया है। इनमें रेरा में पंजीकृत जेडीए परियोजनाओं का पूरा विवरण, गैर-कृषकों को शामिल करने वाले जेडीए समझौते और रेरा की मंजूरी के बाद रद्द की गई जेडीए परियोजनाएं शामिल हैं।
सरकार ने विजिलेंस को यह भी जांचने को कहा है कि कहीं इन परियोजनाओं के जरिए धारा 118 के प्रावधानों को दरकिनार कर बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश तो नहीं हुई। इसके साथ ही यह भी परखा जाएगा कि रेरा ने रेरा एक्ट की धारा 5 के तहत प्रमोटरों की वित्तीय क्षमता, भूमि रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों की जांच संबंधी अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का सही तरीके से पालन किया या नहीं।
सरकार ने मामले को गंभीर मानते हुए विजिलेंस ब्यूरो को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं, ताकि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सके। इस कार्रवाई को प्रदेश में जमीन और रियल एस्टेट से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।






