शुकदेव ऋषि की तपोस्थली अटी भारी भरकम गंदगी से
. शुकदेव वाटिका में गंदगी की भरमार, यहां पैर डालना तो दूर इसे देखना पसंद नहीं किया जा रहा है
राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 21 से सटी नगर परिषद सुंदरनगर के अंतर्गत शुकदेव वाटिका में इतनी अधिक गंदगी की भरमार है कि यहां कोई पैर नहीं डाल सकता क्योंकि जगह जगह बदबू मारता कूड़ा-कचरा पसरा पड़ा है तो रास्तों पर पेड़ उखड़े गिरे पड़े हैं। गंदे पानी से लबालब हुई शुकदेव वाटिका को सजाना संवारना तो दूर की बात यहां झाड़ियां बेतरतीब फैली बढ़ी हैं और चारों ओर जहरीली घास आदि जंगल की तर्ज पर उगी बढ़ी है।
पत्थर-मिट्टी आदि के ढेर और बालकों से संबंधित कुछेक यंत्र टूटे फूटे पड़े हैं देखकर ऐसा लगता है कि शुकदेव मुनि (शुकदेव ऋषि)की तपोभूमि कहलाने वाला यह ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल किसी नरक के द्वार से कम नहीं है जहां है, तो बस बदबू ही बदबू और ऊंचाइयां छूता जा रहा प्रदूषण।
बुद्धिजीवी लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग एवं प्रशासन की बेरुखी के चलते रिकार्ड गंदगी में अपनी बदहाली के आंसू रोती शुकदेव वाटिका को अपने हाल पर छोड़ उदासीन रवैया अपनाया गया है जो दीपावली पर्व के निकट आने पर भी शहर के इस महत्वपूर्ण स्थल में व्यापक सफाई व्यवस्था बनाने की ओर ध्यान नहीं दे रहा है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण इसलिए भी है, क्योंकि धर्म को याद न कर सरेआम स्वच्छता अभियान की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। लोगों ने डीसी मंडी से पुरजोर मांग की है कि शुकदेव वाटिका जहां गंदगी का साम्राज्य है की वजह से कोरोना जैसी महामारी की तर्ज पर बीमारी न फैले इसलिए इसे शीघ्र ही साफ करवाकर अनुपम ढंग से संवारा सजाया जाए।












