IIT मंडी की अनोखी पहल: गोबर और कचरे से बनेगी बिजली, 20KW बायोगैस प्लांट से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी में स्थित IIT मंडी अब स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल करने जा रहा है। संस्थान बेसहारा गायों के गोबर और कैंपस के जैविक कचरे से 20 किलोवाट क्षमता का बायोगैस आधारित पावर प्लांट स्थापित करेगा। यह पहल न केवल ऊर्जा उत्पादन का नया मॉडल पेश करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी।
बायोगैस प्लांट से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा
IIT मंडी द्वारा स्थापित किया जाने वाला यह प्लांट 20 किलोवाट क्षमता का होगा, जिसमें बेसहारा गायों के गोबर के साथ-साथ कैंपस से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट का उपयोग किया जाएगा। इस प्रक्रिया से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिससे संस्थान अपनी ऊर्जा जरूरतों को काफी हद तक खुद पूरा कर सकेगा।
बेसहारा गायों को मिलेगा सहारा
इस परियोजना के तहत कमांद क्षेत्र में घूम रही करीब 40 बेसहारा गायों की देखभाल भी IIT मंडी द्वारा की जा रही है। इन गायों से प्राप्त गोबर का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जाएगा। इससे एक ओर पशुओं को संरक्षण मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा का सतत स्रोत तैयार होगा।
स्थापना दिवस पर हुआ ऐलान
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा 30 मार्च को संस्थान के 17वें स्थापना दिवस के अवसर पर की गई। इस मौके पर निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि यह पहल संस्थान को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने भविष्य में इस मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की योजना भी साझा की।
ग्रामीणों को भी मिलेगा लाभ
इस योजना का लाभ केवल संस्थान तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में IIT मंडी स्थानीय ग्रामीणों से गोबर खरीदने की योजना बना रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, भविष्य में इस प्लांट से मंडी शहर को भी ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
पूरे देश के लिए बन सकता है मॉडल
यदि यह योजना सफल होती है, तो यह न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल प्रोजेक्ट बन सकती है। यह पहल स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण है।
कार्यक्रम में शामिल हुए प्रमुख अतिथि
स्थापना दिवस समारोह में क्रिस गोपालकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया गया।
कुल मिलाकर, IIT मंडी की यह पहल “कचरे से ऊर्जा” के सिद्धांत को जमीन पर उतारते हुए एक सतत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर मजबूत कदम मानी जा रही है।












