हिमाचल में सरकारी नौकरी के लिए ‘चिट्टा टेस्ट’ जरूरी, प्रोफेशनल कोर्स वाले स्टूडेंट्स की भी हर साल होगी जांच
शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री सुक्खविंदर सिंह सुक्खू ने बड़ा फैसला लिया है। सोमवार को शिमला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि भविष्य में सरकारी नौकरी पाने के लिए युवाओं को ‘चिट्टा टेस्ट’ से गुजरना होगा। इसके अलावा सरकारी संस्थानों में डॉक्टर, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स कर रहे छात्रों की भी हर साल ड्रग जांच करवाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को नशा मुक्त बनाने के लिए व्यापक अभियान चला रही है और अब केवल तस्करों ही नहीं बल्कि नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि सरकारी सेवाओं में ऐसे युवाओं को अवसर नहीं दिया जाएगा जो नशे की गिरफ्त में हों। सरकार चाहती है कि प्रशासन और सरकारी संस्थानों में स्वस्थ, जिम्मेदार और अनुशासित युवा आगे आएं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। कई मामलों में सरकारी कर्मचारी भी संलिप्त पाए गए हैं, जिन पर सख्त कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में युवाओं को नशे से बचाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान भी तेज किए जाएंगे।
सरकार के इस फैसले के तहत अब सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया में ड्रग टेस्ट को अनिवार्य किए जाने की दिशा में काम शुरू होगा। वहीं मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स कर रहे विद्यार्थियों की नियमित जांच के लिए भी नीति तैयार की जाएगी। सरकार का मानना है कि युवाओं को शुरुआत में ही नशे से दूर रखने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को बर्बाद करता है। इसलिए सरकार किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अपील की कि वे नशे के खिलाफ इस अभियान में सरकार का सहयोग करें और युवाओं को सही दिशा देने में अपनी भूमिका निभाएं।






