धवाला ने जलशक्ति अधिकारी के आवास पर मारा छापा
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री रमेश धवाला ने जलशक्ति विभाग देहरा के एक अधिकारी के सरकारी आवास पर अचानक छापा मारा। इस दौरान विभाग के दो सरकारी कर्मचारी अफसर के निजी घरेलू कार्यों में लगे हुए थे। इस पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए धवाला ने इसे जनता के पैसों और संसाधनों का खुला दुरुपयोग बताया। धवाला ने कहा कि जिन कर्मचारियों को फील्ड में पानी जैसी मूलभूत सुविधा मुहैया करवाने के लिए रखा गया है, उनसे झाड़ू-पोछा और घरेलू मरम्मत का कार्य लिया जा रहा है। दोनों कर्मचारियों को 50,000 प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है, जो जनता के टैक्स का पैसा है और उसका ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से करेंगे और मांग करेंगे कि दोषी अफसर से दोनों कर्मचारियों की सैलरी की रिकवरी की जाए। यह मामला एंटी करप्शन कानून के दायरे में आता है और सरकार को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। धवाला ने अधिकारी पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनका फोन तक नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि मैं खुद जलशक्ति विभाग का मंत्री रह चुका हूं, लेकिन आज कुछ अधिकारी इतने घमंडी हो गए हैं कि जनप्रतिनिधियों को भी जवाब देना जरूरी नहीं समझते। यह रवैया लोकतंत्र के खिलाफ है।
जलशक्ति विभाग देहरा और ज्वालामुखी में भर्ती गड़बडिय़ों पर उठाए सवाल
रमेश धवाला ने जलशक्ति विभाग देहरा और ज्वालामुखी में मल्टीटास्क वर्कर की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती में सरकार द्वारा तय मेरिट और नियमों को ताक पर रखकर कम प्रतिशत वालों को नौकरी पर रखा गया, जबकि योग्य और जरूरतमंद युवा बेरोजगार रह गए। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि यह युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। सरकारी नौकरी अब सिफारिश और पहुंच का माध्यम बन गई है, जिससे आम आदमी का विश्वास टूट रहा है।
विधायक संजय पर साधा निशाना
धवाला ने ज्वालामुखी विधायक संजय रत्न पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अब विभागों में वही काम होता है, जिसकी चिट्टी विधायक देता है। अब आम आदमी को हर छोटे से छोटे काम के लिए नेताओं के पीछे भागना पड़ता है, जो गलत परंपरा है। धवाला ने कहा कि जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों को दंडित नहीं किया जाता, वे जनता की आवाज बनकर संघर्ष जारी रखेंगे।












