15 साल की लंबी लड़ाई के बाद 90 वर्षीय वृद्धा को मिला न्याय, AFT ने बहाल की फैमिली पेंशन
रितेश चौहान, सरकाघाट
सरकाघाट की 90 वर्षीय वृद्धा चिन्ती देवी को आखिरकार 15 वर्षों बाद न्याय मिल गया है। सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) चंडीगढ़ बेंच ने सेना मुख्यालय को आदेश दिए हैं कि उन्हें उनके दिवंगत पति की फैमिली पेंशन जारी की जाए तथा रोकी गई पूरी राशि ब्याज सहित तीन माह के भीतर अदा की जाए। जानकारी के अनुसार चिन्ती देवी के पति स्वर्गीय लालाराम वर्ष 1948 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। करीब 14 वर्ष की सेवा के बाद वर्ष 1960 में वह हिमाचल पुलिस में भर्ती हो गए थे।
वर्ष 2011 में उनके निधन के बाद पुलिस विभाग की ओर से परिवार को पेंशन मिलती रही, लेकिन सेना की तरफ से फैमिली पेंशन जारी नहीं की गई। परिवार के सदस्य करीब 15 वर्षों तक सेना मुख्यालय के साथ पत्राचार करते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद चिन्ती देवी ने अधिवक्ता के.के. वर्मा के माध्यम से सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) चंडीगढ़ में याचिका दायर की।
मामले की सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने सेना मुख्यालय को निर्देश दिए कि चिन्ती देवी को उनके पति की मृत्यु के बाद से देय फैमिली पेंशन जारी की जाए। साथ ही रोकी गई पूरी राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान किया जाए। आदेश में यह भी कहा गया है कि तय समय में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर 8 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
इस फैसले को पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अन्य जरूरतमंद परिवारों को भी न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है। ट्रिब्यूनल के फैसले से चिन्ती देवी और उनके परिवार ने राहत की सांस ली है।






