पाकिस्तान की नींद उड़ाएगी चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना, तैयार हुआ मास्टर प्लान
मंडी। पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली बहुप्रतीक्षित चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना का मास्टर प्लान तैयार हो गया है। परियोजना के तहत चिनाब की सहायक नदी चंद्रा का पानी ब्यास नदी में मोड़ा जाएगा, जिससे गर्मियों के दौरान भाखड़ा बांध के माध्यम से पड़ोसी राज्यों को अतिरिक्त जल उपलब्ध कराया जा सकेगा।
परियोजना के तहत लाहौल के कोकसर में बनने वाला बांध 6048 घन मीटर प्रति सेकंड तक के जल-प्रवाह को झेलने में सक्षम होगा। उत्तराखंड की चमोली त्रासदी से सबक लेते हुए इसमें सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। केंद्रीय जल आयोग ने अपनी संशोधित रिपोर्ट में ग्लेशियल झील फटने (जीएलओएफ) से संभावित बाढ़ के खतरे का पुनर्मूल्यांकन किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बैराज स्थल से करीब 81 किलोमीटर ऊपर स्थित किसी ग्लेशियल झील के फटने की स्थिति में भी परियोजना पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। अनुमान है कि झील टूटने के करीब दो घंटे 50 मिनट बाद बाढ़ का पानी बांध तक पहुंचेगा, जिसे यह संरचना आसानी से झेल सकेगी।
गौरतलब है कि चंद्राभागा बेसिन में 100 से अधिक ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है। वहीं, चंद्रा नदी में जमा होने वाली गाद को हटाने के लिए नदी तल पर विशेष स्लिपवे डिजाइन तैयार किया गया है, जिससे मानसून के दौरान जमा मिट्टी स्वतः बह जाएगी और परियोजना की कार्यक्षमता बनी रहेगी।






