शिमला में भवन निर्माण के नियम बदले, कोर एरिया बना 'नो कंस्ट्रक्शन जोन'
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अनियंत्रित निर्माण पर लगाम लगाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लगातार बढ़ते कंक्रीट के जंगल, यातायात के बढ़ते दबाव, पर्यावरणीय चुनौतियों और शहर की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रदेश मंत्रिमंडल ने शिमला के भीड़भाड़ वाले कोर एरिया के अधिकांश हिस्से को 'नो कंस्ट्रक्शन जोन' घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इस फैसले के लागू होने के बाद शहर के मध्य स्थित कई प्रमुख क्षेत्रों में निजी स्तर पर नए भवनों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, आम जनता की सुविधा से जुड़े सरकारी भवनों के निर्माण और पुराने भवनों के मूल स्वरूप के अनुरूप पुनर्निर्माण को इस प्रतिबंध से बाहर रखा जाएगा।
टीसीपी विभाग जल्द जारी करेगा मसौदा अधिसूचना
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) विभाग इसी सप्ताह के अंत तक मसौदा अधिसूचना जारी करेगा। इसके बाद लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। इसे राजधानी शिमला के विकास और नियोजन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
इन क्षेत्रों में नहीं मिल सकेगी नए भवनों की अनुमति
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार संजौली सड़क के ऊपर का क्षेत्र, कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), लक्कड़ बाजार, रिज मैदान, रानी झांसी पार्क, मॉल रोड, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, क्लार्क्स होटल, ओक ओवर, छोटा शिमला और वापस संजौली तक का व्यापक इलाका 'नो कंस्ट्रक्शन जोन' के दायरे में आएगा। इन क्षेत्रों में निजी मकानों और अन्य नए भवनों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
विकास योजना-2041 के बाद फिर बदले नियम
दिलचस्प बात यह है कि जिन क्षेत्रों में अब निर्माण पर रोक लगाने की तैयारी है, उन्हें करीब डेढ़ वर्ष पहले सर्वोच्च न्यायालय से मंजूर शिमला विकास योजना-2041 के तहत आवश्यकता आधारित स्व-उपयोग निर्माण के लिए खोला गया था। इससे पहले वर्ष 2000 में अधिसूचित 17 ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध था।
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद करीब 414.36 हेक्टेयर ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में सीमित निर्माण की अनुमति मिलने से कई भू-स्वामियों को राहत मिली थी, लेकिन अब सरकार ने पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील और अत्यधिक घनी आबादी वाले क्षेत्रों को दोबारा 'नो कंस्ट्रक्शन जोन' घोषित करने का फैसला लिया है।
पर्यावरण संरक्षण और शहर की पहचान बचाने पर जोर
सरकार का मानना है कि इस फैसले से शिमला के हरित क्षेत्रों, प्राकृतिक ढलानों, पर्यावरणीय संतुलन और ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही अनियोजित निर्माण और बढ़ते यातायात के दबाव को नियंत्रित करने में भी यह निर्णय अहम साबित होगा।
हालांकि, विकास योजना-2041 के तहत निर्माण की उम्मीद लगाए बैठे कई भू-स्वामियों के लिए यह फैसला झटका माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें टीसीपी विभाग की मसौदा अधिसूचना और उस पर आने वाली आपत्तियों एवं सुझावों पर टिकी हैं, जिसके बाद अंतिम नियम लागू किए जाएंगे।






