हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कैप्टिव डीजल जेनरेटर से पैदा बिजली पर नहीं लगेगा टैक्स
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने औद्योगिक एवं अन्य उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए बिजली ड्यूटी को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई औद्योगिक इकाई, संस्थान या अन्य उपभोक्ता डीजल जेनरेटर अथवा किसी वैकल्पिक साधन से बिजली का उत्पादन केवल अपने निजी इस्तेमाल के लिए करता है, तो उस बिजली पर राज्य सरकार बिजली ड्यूटी के रूप में टैक्स नहीं लगा सकती।
हाई कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश बिजली (ड्यूटी) अधिनियम, 2009 की धारा 3(1)(xi) को असंवैधानिक एवं अवैध मानते हुए इसे रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले से उन उद्योगों और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जो बिजली आपूर्ति बाधित होने या अन्य परिस्थितियों में अपनी जरूरत पूरी करने के लिए डीजल जेनरेटर अथवा अन्य माध्यमों से स्वयं बिजली का उत्पादन करते हैं।
यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मेसर्स रुचिरा पेपर्स लिमिटेड की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने स्वयं के उपयोग के लिए जेनरेटर से उत्पादित बिजली पर राज्य सरकार की ओर से बिजली ड्यूटी लगाए जाने को चुनौती दी थी।
अदालत ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कानून के संबंधित प्रावधानों और स्वयं के उपभोग के लिए उत्पादित बिजली पर लगाए जा रहे शुल्क का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि केवल अपने इस्तेमाल के लिए बिजली पैदा करने वाले उपभोक्ता से बिजली ड्यूटी की वसूली का प्रावधान कानूनी कसौटी पर टिकता नहीं है।
खंडपीठ ने इसी आधार पर बिजली (ड्यूटी) अधिनियम, 2009 की धारा 3(1)(xi) को रद्द कर दिया। अदालत के इस निर्णय को उद्योग जगत और स्वयं बिजली उत्पादन करने वाले बड़े उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
उद्योगों पर क्या पड़ेगा असर?
बिजली आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में कई औद्योगिक इकाइयां उत्पादन प्रक्रिया को जारी रखने के लिए डीजल जेनरेटर और अन्य वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल करती हैं। ऐसे में स्वयं उत्पादित और स्वयं उपभोग की जाने वाली बिजली पर ड्यूटी लगाए जाने से उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता था।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अपने इस्तेमाल के लिए बिजली पैदा करने वाले उपभोक्ताओं पर इस प्रावधान के तहत बिजली ड्यूटी लगाने का आधार समाप्त हो गया है। इससे औद्योगिक इकाइयों के साथ-साथ उन संस्थानों और उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की संभावना है, जो अपनी बिजली की जरूरत का कुछ हिस्सा स्वयं पूरा करते हैं।
हाई कोर्ट के इस फैसले को हिमाचल के उद्योग जगत के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्वयं के उपयोग के लिए बिजली उत्पादन पर लगने वाले अतिरिक्त कर संबंधी विवाद को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।






