हिमाचल में दौड़ेंगी 1000 नई इलेक्ट्रिक बसें, 200 हाइड्रोजन बसों की भी तैयारी
हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश को ग्रीन स्टेट बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब प्रदेश में 1000 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बेड़े में 200 हाइड्रोजन बसें शामिल करने की योजना भी बनाई गई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को हमीरपुर बस स्टैंड से 35 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ऊर्जा आधारित बनाने की सरकार की योजना की जानकारी दी।
बेरोजगार युवाओं को इलेक्ट्रिक बस खरीदने पर 50 लाख तक सब्सिडी
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक इलेक्ट्रिक बस की कीमत करीब एक करोड़ रुपये है। सरकार बेरोजगार युवाओं को इलेक्ट्रिक बस खरीदने के लिए 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध करवाएगी। इसके अलावा बस के संचालन के लिए युवाओं को हर महीने 75 हजार रुपये की सहायता भी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और प्रदेश में स्वच्छ एवं हरित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जहां प्रदूषण कम होगा, वहीं युवाओं के लिए आय का स्थायी साधन भी तैयार हो सकेगा।
अगले पांच साल में एचआरटीसी को 8 हजार करोड़ रुपये
सीएम सुक्खू ने कहा कि एचआरटीसी हिमाचल की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ है। वर्तमान में निगम के बेड़े में करीब 3000 बसें हैं। प्रदेश सरकार हर वर्ष एचआरटीसी को करीब 800 करोड़ रुपये की ग्रांट देती है। इसके अलावा निगम अपनी बसों के संचालन से भी आय अर्जित करता है।
उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में प्रदेश सरकार एचआरटीसी को करीब 8000 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाएगी। सरकार का लक्ष्य निगम को धीरे-धीरे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि परिवहन व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।
1000 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की दिशा में बढ़ा कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बजट में जब 297 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का लक्ष्य रखा था, तब अधिकारियों को भी इस लक्ष्य को पूरा करने को लेकर आशंका थी। लेकिन सरकार ने इस लक्ष्य को पूरा करके दिखाया है। अब प्रदेश में 1000 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से एचआरटीसी के खर्च में भी बड़ी बचत होगी। एक इलेक्ट्रिक बस को चलाने की लागत करीब 38 रुपये प्रति किलोमीटर आती है, जबकि डीजल बस के संचालन पर करीब 75 रुपये प्रति किलोमीटर खर्च होता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों से प्रति किलोमीटर संचालन लागत में आधे से अधिक की बचत संभव है।
पेंशन और वेतन के लिए भी सरकार दे रही सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि एचआरटीसी की पेंशन व्यवस्था को लेकर भी सरकार लगातार काम कर रही है। निगम को पेंशन के लिए करीब 38 करोड़ रुपये और कर्मचारियों के वेतन के लिए करीब 40 करोड़ रुपये की सहायता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार एचआरटीसी को मजबूत करने के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों को भी प्राथमिकता दे रही है। परिवहन निगम को आधुनिक तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा से जोड़कर प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।
इलेक्ट्रिक के साथ हाइड्रोजन बसों पर भी जोर
प्रदेश सरकार केवल इलेक्ट्रिक बसों तक सीमित नहीं रहना चाहती। सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए एचआरटीसी के बेड़े में 200 हाइड्रोजन बसें शामिल करने की योजना भी तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों को बढ़ावा देने से डीजल पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। सरकार का लक्ष्य हिमाचल को ग्रीन स्टेट बनाने का है और स्वच्छ ऊर्जा आधारित सार्वजनिक परिवहन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्वच्छ परिवहन से ग्रीन स्टेट की ओर हिमाचल
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते इस्तेमाल से न केवल एचआरटीसी के संचालन खर्च में कमी आएगी, बल्कि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण को भी संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
1000 नई इलेक्ट्रिक बसें, 200 हाइड्रोजन बसों की योजना और युवाओं के लिए सब्सिडी—सरकार की यह पहल हिमाचल में परिवहन व्यवस्था को बदलने के साथ-साथ रोजगार और पर्यावरण, दोनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव लाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।






