'जेल भरो आंदोलन' के समर्थन में किसान, MSP की गारंटी से कर्ज माफी तक राष्ट्रपति को भेजा मांग-पत्र
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 10 अगस्त को प्रस्तावित देशव्यापी जेल भरो एवं अन्य विरोध कार्यक्रमों के समर्थन में किसानों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मांग-पत्र भेजकर केंद्र सरकार से किसान, मजदूर और ग्रामीण वर्ग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। मांग-पत्र सीटू ऊना के महासचिव गुरनाम सिंह के नेतृत्व में एडीसी ऊना ईशांत जसवाल के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया। इस दौरान उनके साथ किसान सभा के अध्यक्ष केके राणा भी मौजूद रह।
मांग-पत्र में कहा गया है कि भारत छोड़ो दिवस की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में गांवों, पंचायतों, ब्लॉकों, जिलों, कस्बों और शहरों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सीटू के महासचिव गुरनाम सिंह ने कहा कि कृषि, आर्थिक और सामाजिक संकट की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए विभिन्न मांगें उठाई हैं।
किसानों की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को स्वीकार न करना तथा ऐसे सभी मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करना शामिल है, जिनका भारतीय कृषि, उद्योग, श्रमिकों और राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर कानूनी गारंटी वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य और सुनिश्चित सरकारी खरीद के लिए कानून बनाने की मांग की गई है।
मांग पत्र में ऋणग्रस्तता समाप्त करने के लिए व्यापक कर्ज माफी, किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा और पूर्ण पुनर्वास, चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने तथा सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
किसानों ने मनरेगा को मजबूत करते हुए प्रत्येक वर्ष 200 दिनों के रोजगार और न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी देने, विद्युत निजीकरण विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को वापस लेने तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को रद्द करने की मांग की है।
किसानों ने व्यापक सार्वजनिक फसल एवं पशुधन बीमा योजना, प्रभावी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन और सार्वजनिक निवेश के माध्यम से हर खेत तक सिंचाई पहुंचाने, 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों को 10 हजार रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने की भी मांग रखी है।
मांग-पत्र में बाढ़ एवं सूखा राहत के लिए पारदर्शी, समयबद्ध और पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था, अनुसंधान एवं विकास के लिए केंद्रीय बजट का 6 प्रतिशत तथा शिक्षा के लिए जीडीपी का 6 प्रतिशत आवंटित करने की मांग भी की गई है। साथ ही सहकारी समितियों और FPOs को कॉरपोरेट कब्जे से बचाने तथा उनका लोकतांत्रिकरण करने की मांग उठाई गई है।






