सोशल मीडिया पर बधाइयों की बौछार, पर जमीनी हकीकत बदहाल; खस्ताहाल हॉस्टल में रहने को मजबूर 20 खिलाड़ी बेटियां
रितेश चौहान। सरकाघाट
सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ है। नेता, अधिकारी और सरकारें सरकाघाट की बेटी काव्या शर्मा के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयनित होने पर गर्व जता रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या उन बेटियों की परेशानियों और सुरक्षा की भी किसी ने चिंता की, जो वर्षों से बदहाल परिस्थितियों में रहकर प्रदेश और देश का नाम रोशन करने के लिए संघर्ष कर रही हैं?
मामला हिमाचल प्रदेश के एकमात्र गर्ल्स बास्केटबॉल स्पोर्ट्स हॉस्टल, सरकाघाट का है। वर्ष 2019 में एक जर्जर भवन में शुरू किए गए इस हॉस्टल में वर्तमान में करीब 20 छात्राएं रह रही हैं। पिछले छह वर्षों से ये खिलाड़ी मूलभूत सुविधाओं के अभाव, असुरक्षा और मानसिक दबाव के बीच अभ्यास कर रही हैं। इसके बावजूद इन बेटियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
इन्हीं छात्राओं में शामिल काव्या शर्मा आज सर्बिया में होने वाली वर्ल्ड स्कूल बास्केटबॉल चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं। काव्या आठवीं कक्षा में इस हॉस्टल से जुड़ी थीं और तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सपना साकार किया है।
कोच एवं पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी राकेश ठाकुर के मार्गदर्शन में इस हॉस्टल की लगभग 70 छात्राएं अब तक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं, लेकिन उनकी उपलब्धियों के अनुरूप सुविधाएं आज भी नदारद हैं।
असुरक्षा और अभाव में गुजर रहा जीवन
हॉस्टल का भवन सिंगल स्टोरी है। गर्मियों में तापमान 40 डिग्री तक पहुंच जाता है, सर्दियों में कड़ाके की ठंड और बरसात में छत से पानी टपकता है। कई कमरों में 10-10 छात्राओं को एक साथ रहना पड़ता है।
हाईवे के बिल्कुल किनारे स्थित इस हॉस्टल में सुरक्षा के नाम पर केवल टीन की अस्थायी चारदीवारी है। छात्राओं और अभिभावकों का कहना है कि यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जिससे हर समय चिंता बनी रहती है।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के आश्वासन भी अधूरे
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी हॉस्टल का दौरा कर चुके हैं। छात्राओं ने उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। शिक्षा मंत्री ने सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी, जबकि मुख्यमंत्री ने नए भवन और आवश्यक निर्माण कार्यों के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर तैयारियां और कागजी कार्रवाई होने के बावजूद आज तक कोई ठोस काम शुरू नहीं हो पाया है।
अधिकारी क्या कहते हैं?
एसडीएम राजेंद्र गौतम ने बताया कि हॉस्टल के लिए साइट प्लान और नक्शा तैयार करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग को दिए गए थे।
वहीं, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता भूपेंद्र कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद साइट प्लान और एस्टीमेट तैयार कर शिक्षा विभाग को भेज दिया गया था।
स्कूल प्रिंसिपल अनीता आजाद और डिप्टी डायरेक्टर यशवीर सिंह का कहना है कि प्रस्ताव शिमला भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है।
बड़ा सवाल
जब बदहाल परिस्थितियों में रहकर एक बेटी अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती है, तो सोचिए यदि उसे बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित माहौल मिले तो वह कितनी ऊंचाइयों को छू सकती है। काव्या शर्मा की सफलता जहां प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, वहीं स्पोर्ट्स हॉस्टल की बदहाली व्यवस्था के लिए एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है।






