भविष्य की तकनीक से जुड़ेगा हिमाचल, छात्रों को स्कूल स्तर पर मिलेगी AI शिक्षा
धर्मशाला: तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया के बीच हिमाचल प्रदेश के स्कूली छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) धर्मशाला ने कक्षा 6वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने का प्रारूप तैयार कर लिया है। यदि राज्य सरकार से मंजूरी मिलती है, तो आने वाले समय में प्रदेश के छात्र स्कूल स्तर से ही एआई जैसी आधुनिक तकनीक की पढ़ाई कर सकेंगे।
बोर्ड का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा, रोजगार, उद्योग, स्वास्थ्य, बैंकिंग और शोध जैसे लगभग हर क्षेत्र का अहम हिस्सा बनने वाला है। ऐसे में छात्रों को शुरुआत से ही तकनीक के प्रति जागरूक और सक्षम बनाना बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ स्कूल शिक्षा बोर्ड ने एआई आधारित पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि दुनिया भर में एआई तकनीक तेजी से विकसित हो रही है और भारत भी इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी भविष्य में एआई आधारित कार्यक्षेत्रों से जुड़ सकती है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश के छात्रों को तकनीकी शिक्षा के मामले में पीछे नहीं रहने दिया जा सकता।
डॉ. शर्मा ने बताया कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पहले ही एआई को स्किल विषय के रूप में अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर चुका है। इसके अलावा कई अन्य राज्य शिक्षा बोर्ड भी धीरे-धीरे इसे शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बना रहे हैं। इन्हीं अनुभवों और मॉडलों का अध्ययन करने के बाद हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने भी एआई पाठ्यक्रम तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया।
पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए शिक्षा विशेषज्ञों, तकनीकी जानकारों और शिक्षाविदों की सहायता ली गई। इस दौरान दो चरणों में कार्यशालाएं आयोजित की गईं। पहली कार्यशाला में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए एआई पाठ्यक्रम की प्रारंभिक रूपरेखा तैयार की गई, जबकि दूसरी कार्यशाला में विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर आवश्यक संशोधन कर अंतिम प्रारूप तैयार किया गया। बोर्ड ने विशेष ध्यान रखा कि पाठ्यक्रम विद्यार्थियों की आयु और समझ के अनुरूप हो, ताकि वे आसानी से नई तकनीक को समझ सकें।
बोर्ड सचिव ने स्पष्ट किया कि छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ नहीं डाला जाएगा। कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों के लिए लगभग 15 घंटे का परिचयात्मक एआई मॉड्यूल तैयार किया गया है, जिसे सामान्य विज्ञान विषय के साथ जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को शुरुआती स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी जानकारी देना है। वहीं कक्षा 9वीं से 12वीं तक एआई को कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम के भीतर शामिल करने की योजना बनाई गई है, ताकि छात्र नियमित पढ़ाई के साथ ही आधुनिक तकनीक से भी जुड़ सकें।
डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार कर लिया गया है और अब इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी का इंतजार है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुति देने का अनुरोध किया गया है। प्रस्तावित बैठक में शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान के अधिकारी और शिक्षा मंत्री भी शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बोर्ड की जिम्मेदारी पाठ्यक्रम तैयार कर सरकार को उपलब्ध करवाने की है, जबकि इसे स्कूलों में लागू करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने जैसे विषयों पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया जाएगा। यदि यह योजना लागू होती है, तो हिमाचल प्रदेश के हजारों छात्र भविष्य की तकनीक से जुड़कर डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।






