नई योजना पर हिमाचल में घमासान: 30 जून की डेडलाइन, 12 लाख मजदूरों और 1194 कर्मचारियों का भविष्य अधर में
शिमला। हिमाचल प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित VB G RAM G Scheme को लागू करने की प्रक्रिया तेज किए जाने के बाद प्रदेश में चिंता बढ़ गई है। यदि यह योजना मौजूदा स्वरूप में लागू होती है तो इसका असर प्रदेश के करीब 12 लाख मनरेगा मजदूरों पर पड़ सकता है, जो वर्षों से इस योजना के तहत रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने राज्यों को 30 जून तक नई योजना अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि बजट आवंटन उन्हीं राज्यों को मिलेगा जो समय रहते इस योजना को लागू करेंगे। ऐसे में हिमाचल प्रदेश के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
प्रदेश सरकार ने प्रस्तावित योजना के कई प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि राज्य के हितों और ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि मजदूरी दर, रोजगार की गारंटी, मानव दिवसों की संख्या और हजारों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर पुनर्विचार आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखें। राज्य सरकार का तर्क है कि प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान मजदूरी दरें भी पर्याप्त नहीं हैं, ऐसे में मानव दिवसों में संभावित कटौती ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकती है।
इसके अलावा मनरेगा से जुड़े 1194 कर्मचारियों के भविष्य और वेतन भुगतान को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इन सभी मुद्दों पर विचार करने के लिए प्रदेश सरकार ने ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। समिति में विभाग के सचिव सी. पालरासू और निदेशक राघव शर्मा भी शामिल हैं। यह समिति 29 जून तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि हिमाचल प्रदेश नई योजना को किस स्वरूप में स्वीकार करेगा या फिर केंद्र सरकार के समक्ष किन शर्तों के साथ अपना पक्ष रखेगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नई योजना ग्रामीण रोजगार को और मजबूत करेगी या फिर लाखों मजदूरों की आय और भविष्य को लेकर नई चिंताएं खड़ी करेगी।






