15 साल का इंतजार खत्म! लाहौल-स्पीति के उदयपुर में बनेगा नया पॉलिटेक्निक कॉलेज
शिमला/लाहौल-स्पीति: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के उदयपुर में प्रस्तावित पॉलिटेक्निक कॉलेज का निर्माण अब जल्द शुरू होने की उम्मीद है। करीब 15 वर्षों से लंबित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आखिरकार बड़ी सफलता मिली है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कॉलेज निर्माण के लिए 2.0435 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इससे लंबे समय से तकनीकी शिक्षा संस्थान की मांग कर रहे क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है।
15 साल पुरानी फाइल को मिली मंजूरी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि यह मामला पिछले करीब 15 वर्षों से मंत्रालय में लंबित था। प्रदेश सरकार की लगातार पैरवी और प्रयासों के बाद मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ ने वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम-1980 के तहत तकनीकी शिक्षा विभाग को वन भूमि उपयोग की मंजूरी प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि यह मंजूरी प्रदेश सरकार की जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा
उदयपुर में पॉलिटेक्निक कॉलेज बनने से लाहौल-स्पीति और आसपास के जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के लिए कुल्लू, मंडी, शिमला या अन्य जिलों का रुख नहीं करना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर ही इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा उपलब्ध होने से युवाओं का समय और खर्च दोनों बचेंगे।
रोजगार और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा
राजेश धर्माणी ने कहा कि यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र नहीं होगा, बल्कि कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे जनजातीय क्षेत्र के युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
सरकार की प्राथमिकता में जनजातीय क्षेत्र
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार दूरदराज और जनजातीय इलाकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य तकनीकी शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।
उन्होंने विश्वास जताया कि उदयपुर पॉलिटेक्निक कॉलेज हिमाचल प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और आने वाले वर्षों में हजारों युवाओं के भविष्य को नई दिशा देगा।






