विजिलेंस नोटिस पहले मीडिया में पहुंचने पर सुधीर शर्मा ने उठाए सवाल, बोले- निष्पक्ष जांच जरूरी
धर्मशाला: विजिलेंस नोटिस को लेकर धर्मशाला से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। विजिलेंस की ओर से जारी नोटिस में उन्हें 13 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे धर्मशाला पुलिस स्टेशन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा गया है। हालांकि, सुधीर शर्मा का आरोप है कि नोटिस की विषय-वस्तु उनके कार्यालय में आधिकारिक रूप से तामील होने से एक दिन पहले ही मीडिया में उपलब्ध करा दी गई थी।
सुधीर शर्मा के मुताबिक, 11 अगस्त को नोटिस की जानकारी मीडिया में सामने आई, जबकि 12 अगस्त को उनके कार्यालय में नोटिस तामील किया गया। उन्होंने इसे न्याय और निष्पक्ष प्रक्रिया के लिहाज से गंभीर विषय बताते हुए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
'नोटिस से पहले मीडिया तक जानकारी कैसे पहुंची?'
सुधीर शर्मा ने कहा कि यदि नोटिस का उद्देश्य संबंधित आरोपों की जानकारी देकर उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देना था, तो आधिकारिक तामील से पहले ही उसकी जानकारी मीडिया तक कैसे पहुंची, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि इससे उनका पक्ष सामने आने से पहले ही उनके खिलाफ सार्वजनिक धारणा बनाने की कोशिश हो सकती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगना और उसका दोषी साबित होना अलग-अलग बातें हैं। जांच पूरी होने से पहले चुनिंदा जानकारी सार्वजनिक होने से मीडिया ट्रायल जैसा माहौल बन सकता है, इसलिए जांच लंबित रहने के दौरान निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है।
विजिलेंस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी जिक्र
सुधीर शर्मा ने दावा किया कि उन्होंने अपने खिलाफ की जा रही कार्रवाई और कथित उत्पीड़न को लेकर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, धर्मशाला की अदालत में विजिलेंस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
उन्होंने घटनाओं के इस क्रम की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि कहीं उनके द्वारा कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने के बाद जांच एजेंसी की कार्रवाई के जरिए उन पर दबाव बनाने का प्रयास तो नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित जांच एजेंसी का पक्ष अलग से महत्वपूर्ण होगा।
पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग
भाजपा विधायक ने मांग की है कि 11 अगस्त को नोटिस की जानकारी मीडिया तक पहुंचने के स्रोत और माध्यम की जांच की जाए। साथ ही एफआईआर दर्ज होने के समय, परिस्थितियों और उसके कारणों की भी स्वतंत्र जांच हो।
उन्होंने कहा कि जांच किसी ऐसे स्वतंत्र और निष्पक्ष प्राधिकारी से कराई जानी चाहिए, जो किसी भी राजनीतिक या सरकारी दबाव से मुक्त हो।
'कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करूंगा'
सुधीर शर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और कानून के शासन में पूरा विश्वास है और वह किसी भी वैध एवं निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कानून के तहत उपलब्ध सभी वैधानिक उपायों का इस्तेमाल करते रहेंगे और किसी दबाव के कारण अपने कानूनी अधिकारों से पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल नोटिस या एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि क्या किसी व्यक्ति के न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बाद उसे जांच के नाम पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग दोहराई है।






