ड्रेनेज नहीं, सड़क पर तालाब... नेरचौक के डडौर वार्ड में लोगों का जीना दूभर
फोरलेन निर्माण के बाद बढ़ी परेशानी, बारिश में दुकानों तक घुस रहा गंदा पानी
महेंद्र सिंह राणा, अनंत ज्ञान, भौर
नगर परिषद नेरचौक के वार्ड नंबर-9 डडौर में फोरलेन निर्माण के बाद ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि सर्विस रोड अब सड़क कम और तालाब ज्यादा नजर आने लगी है। सड़क पर हर समय गंदा पानी जमा रहने से स्थानीय दुकानदारों और लोगों का जीवन नारकीय बन गया है। कारोबार प्रभावित हो रहा है, वहीं बदबू और गंदगी के कारण बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन निर्माण से पहले सड़क किनारे उचित ड्रेनेज व्यवस्था मौजूद थी, जिससे बरसाती और गंदा पानी आसानी से निकल जाता था। लेकिन निर्माण कार्य के दौरान नालियों को या तो बंद कर दिया गया या फिर उनकी अनदेखी की गई। इसका नतीजा यह हुआ कि डडौर स्थित मार्बल मार्केट के आगे सर्विस रोड पर स्थायी रूप से पानी जमा रहने लगा और पूरी सड़क जलभराव की चपेट में आ गई।
मोटरसाइकिल मैकेनिक नंद लाल ने बताया कि उनकी दुकान और घर दोनों इस गंदे पानी से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि समस्या को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और नगर परिषद नेरचौक के समक्ष कई बार उठाया गया, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि बदबू और दूषित पानी के बीच परिवार का रहना बेहद मुश्किल हो गया है।
फर्नीचर कारोबारी राकेश कुमार ने बताया कि अभी गर्मियों में ही सड़क पर पानी भरा रहता है, ऐसे में बरसात के दौरान हालात कितने भयावह होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष पानी उनकी दुकान में घुस गया था, जिससे लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। नुकसान और डर के चलते उन्हें दूसरी जगह किराये पर दुकान तक लेनी पड़ी।
स्थानीय दुकानदार गोपाल सिंह, रमेश कुमार, अनंत राम, विवेक कुमार, चरण दास और बंटी ने भी प्रशासन और सरकार के प्रति नाराजगी जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि एनएचएआई को तत्काल प्रभाव से ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाएं या नगर परिषद नेरचौक को स्थायी समाधान निकालने के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाए।
लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही, जिसके कारण वार्ड के लोग बदहाल परिस्थितियों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों ने चेतावनी दी है कि यदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जा सकतीं तो उन्हें नगर परिषद क्षेत्र से बाहर किया जाए।






