भू-स्खलन की जद में आया जिया-मनाली फोरलेन
जिला मुख्यालय कुल्लू के साथ सटे शांगरीबाग में धीरे-धीरे पहाड़ी धंस रही है, जिससे पत्थर व क्रेटवॉल फोरलेन पर पहुंच गए हैं। इस कारण भुंतर-मनाली वाया वामतट सड़क मार्ग भू-स्खलन की जद में आ गया है। आलम यह है कि यहां लगातार हो रहे भू-स्खलन होने के कारण खतरा बढ़ता जा रहा है और ऐसे में कभी भी वाहन भूस्खलन की चपेट में आ सकते हैं। गौरतलब है कि देवधार (शांगरीबाग) में भू-स्खलन का सिलसिला पिछले कई सालों से जारी है। फोरलेन निर्माण के दौरान पहाड़ी की कटिंग के कारण इस पहाड़ी में दरारें आ गई थी, जिस कारण देवधार गांव इसकी चपेट में आए थे, जिसे कई परिवारों को मजबूरन अपने सपनों के आशियानों को छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा था। उसके बाद भी पहाड़ी धंसने का यह सिलसिला रुका नहीं। अब तो हालात बेहद खराब हैं, जिसके कारण देवधार गांव में जो कुछ तीन- चार घर बचे थे, अब उनके ऊपर भी खतरा मंडराने लगा है। पहाड़ी पर भू-स्खलन रोकने के लिए एनएचएआई की ओर से जो डंगा और क्रेटवॉल लगाई गई थी वह भी अब नीचे फोरलेन पर पहुंच गई है। इसके अलावा यहां पानी का भी लगातार रिसाव हो रहा है, जिससे दीवार के ऊपर लगी क्रेटवाल का कुछ हिस्सा सड़क में गिर गया है। ऐसे में सड़क तंग हो चुकी है। वाहनों के लिए भी जोखिम की स्थिति पैदा हो रही है। पिछले काफी समय से खतरा लगातार बढ़ रहा है और कभी भी कोई बड़ा हादसा पेश आ सकता है लेकिन एनएचएआई इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा। लिहाजा, भू-स्खलन को रोकने के लिए शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मलबा फोरलेन की दूसरी तरफ को भी नुकसान पहुंचा सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस फोरलेन सड़क से मनाली के लिए वाहन जाते हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर पहाड़ी पर घरों को तो खतरा है ही साथ ही समर सीजन के चलते इन दिनों काफी संख्या में पर्यटक वाहन भी यहीं से होकर गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार भूस्खलन होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
2023 में आपदा में ढही थीं फोरलेन की दीवार
कुल्लू घाटी में जुलाई 2023 में आई भयंकर आपदा के दौरान यहां फोरलेन की दीवारें ढह गई थीं। हैरानी की बात है कि काफी समय बीत जाने के बाद भी अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया है। भू-स्खलन को रोकने के लिए जल्द हल निकालना चाहिए।












