धर्मशाला में कम वोटिंग ने बढ़ाई सियासी बेचैनी, मतदाता सूचियों के SIR की उठी मांग
धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला चुनाव में अपेक्षा से कम मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। कई वार्डों में मतदान का प्रतिशत पिछले चुनावों की तुलना में कम दर्ज होने के बाद अब मतदाता सूचियों की शुद्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं ने मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की मांग तेज कर दी है।
चुनाव परिणामों के बीच यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सूचियों में शामिल रहे, जो लंबे समय से क्षेत्र से बाहर रह रहे हैं, जबकि कई पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं मिले। इसके चलते मतदान प्रतिशत प्रभावित हुआ और कई वार्डों में अपेक्षित मतदान नहीं हो पाया।
राजनीतिक दलों का कहना है कि यदि मतदाता सूचियों का समय-समय पर व्यापक पुनरीक्षण किया जाए तो वास्तविक मतदाताओं की सही संख्या सामने आएगी और मतदान प्रतिशत भी बढ़ेगा। नेताओं का तर्क है कि धर्मशाला जैसे शहरी क्षेत्रों में नौकरी, व्यवसाय और शिक्षा के कारण लोगों का लगातार आवागमन होता रहता है, ऐसे में मतदाता सूची को नियमित रूप से अपडेट करना जरूरी है।
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि कम मतदान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में त्रुटियां, मतदान के प्रति उदासीनता और शहरी क्षेत्रों में कम राजनीतिक भागीदारी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। कई वार्डों में मतदान केंद्रों पर अपेक्षित भीड़ नहीं देखने को मिली, जिससे मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई।
इस मुद्दे पर अब विभिन्न राजनीतिक दल चुनाव आयोग से मतदाता सूचियों की विशेष समीक्षा कराने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि भविष्य के चुनावों से पहले व्यापक सत्यापन अभियान चलाकर अपात्र नामों को हटाया जाए और छूटे हुए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाए।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नगर निगम चुनाव में कम मतदान का असर कई वार्डों के चुनावी परिणामों पर भी पड़ा है। ऐसे में आने वाले समय में मतदाता सूची सुधार और मतदाता जागरूकता अभियान प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन सकते हैं।






