तुर्किये के साथ सभी व्यापारिक व सांस्कृतिक संबंध तुरंत प्रभाव से किए जाएं समाप्त: गोविंद
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने तुर्किये के भारत विरोधी रुख की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि तुर्किये के साथ सभी व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध तुरंत प्रभाव से समाप्त किए जाएं। उन्होंने कहा कि हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन करते हुए भारत विरोधी भूमिका निभाई थी। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन और तकनीकी सहायता देकर भारत की सुरक्षा के खिलाफ कार्य किया था। इस प्रकार की गतिविधियां न केवल भारत की संप्रभुता के खिलाफ हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गलत संदेश प्रेषित करती हैं। गोविंद ने तुर्किये के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तुर्किये में भूकंप जैसी विनाशकारी आपदा आई थी, तब भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तुर्किये को हरसंभव सहायता भेजी थी। भारतीय सेना और एनडीआरएफ की टीमें, वहां पर राहत और बचाव कार्यों में जुटी रहीं। यह भारत की उस नीति को दर्शाता है। इसमें आपदा के समय मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन इसके विपरीत, तुर्किये ने मानवता का सम्मान न करते हुए भारत की पीठ पीछे पाकिस्तान का साथ देकर हमारे विश्वास को ठेस पहुंचाई। यह कृत्य अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सहयोग की भावना के विपरीत है। गोविंद ने तुर्किये से सेब आयात के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत हर वर्ष तुर्की से 1 लाख टन से अधिक सेब का आयात करता है, जो कि देश के घरेलू सेब उत्पादकों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक सेब उत्पादन पर आधारित है, जहां लगभग 6 हजार करोड़ रुपए का वार्षिक कारोबार सेब से जुड़ा हुआ है। प्रदेश के 12 में से 8 जिले ऐसे हैं, जहां बड़ी संख्या में किसान और बागवान सेब की खेती से अपनी आजीविका चलाते हैं। इस स्थिति में विदेशी सेब विशेषकर तुर्किये से आयातित सेब, न केवल बाजार को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि प्रदेश के बागवानों को आर्थिक रूप से हानि भी पहुंचा रहे हैं। गोविंद ने बताया कि बीते वर्ष अकेले तुर्किये से लगभग 900 करोड़ रुपए मूल्य के सेब हिमाचल के बाजारों में पहुंचे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान हुआ।












