चंबा में जानलेवा बने सूखे पेड, चौगान से कसाकड़ा मोहल्ला जाने वाले मार्ग पर कई पेड़ दे रहे हादसे को न्योता
जिले में सड़क के किनारे झुके, उखड़े, सूखे व असुरक्षित ढंग से खड़े पेड़ हैं, जो लोगों के लिए आफत बने हुए हैं। ऐसे में ये पेड़ कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। सेवानिवृत्त वन रेंजर बलदेव सिंह ने कहा कि सोमवार दोपहर सरोल (चंबा से लगभग 4-6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित क्षेत्र) में हुई एक गंभीर घटना को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। इस हादसे में बारिश और तूफान की वजह से एक सूखा पेड़ अचानक गिर पड़ा, जिससे एक कार पूरी तरह नष्ट हो गई। गनीमत रही कि इसमें कोई जान का नुकसान नहीं हुआ। बलदेव सिंह ने चेताया कि चंबा के चौगान क्षेत्र से पीडब्ल्यूडी सर्किट हाउस होते हुए कसाकड़ा मोहल्ला जाने वाले मार्ग पर कई सूखे पेड़ खड़े हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। यह रास्ता दो-व्हीलर, चार-व्हीलर और पैदल चलने वालों द्वारा नियमित रूप से उपयोग किया जाता है, जिससे यहां किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बरसात और तूफानों का मौसम चल रहा है, इन पेड़ों का गिरना किसी बड़ी जनहानि को जन्म दे सकता है।
एक साल पहले वरिष्ठ नागरिकों के बैठने वाले स्थान पर भी टला था बड़ा हादसा: बलदेव सिंह
बलदेव सिंह ने यह भी बताया कि ठीक एक साल पहले चौगान के पास जहां वरिष्ठ नागरिक प्रतिदिन बैठते हैं, वहां लगभग 200 से 300 किलो वजनी टहनी अचानक टूटकर गिरी थी। सौभाग्य से उस दिन कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने चेताया कि किस्मत हर बार साथ नहीं देती। अब हमें चेत जाना चाहिए। बलदेव सिंह ने कहा कि सोमवार की घटना हमें यह सीख देती है कि सावधानी ही सुरक्षा है। यह वक्त है सतर्क होने का, ताकि आने वाले समय में कोई अप्रिय हादसा न हो।
बारिश व तूफान ने बढ़ाया खतरा, मिंजर महोत्सव भी नजदीक
इस साल जुलाई में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय मिंजर महोत्सव नजदीक है, जिसमें देश-विदेश से हजारों पर्यटक चंबा आने वाले हैं। इस मौके पर यदि ऐसे सूखे पेड़ों की अनदेखी की गई, तो किसी भी बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विभाग पहचान कर हटाया सूखे पेड़: उपायुक्त
डीसी मुकेश रेपसवाल चंबा ने कहा कि यह एक गंभीर चिंता का विषय है। हमने संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए हैं कि ऐसे सभी सूखे और कमजोर पेड़ों की तत्काल पहचान कर उन्हें हटाया जाए, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो। साथ ही, जिन स्थानों पर पेड़ हटाए जाएंगे, वहां नए पौधे लगाए जाएंगे, जिससे पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।












