मनरेगा मजदूरों को पंचायत सचिव द्वारा जारी सर्टिफिकेट की जांच करवाना गैरकानूनी – भूपेंद्र
हिमाचल प्रदेश के राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड द्वारा मनरेगा और निर्माण मजदूरों को सहायता न देने के लिए लगातार नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। सीटू से संबंधित मनरेगा एवं निर्माण मजदूर फेडरेशन के राज्य उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि श्रमिक बोर्ड, जो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान निजी सचिव के नियंत्रण में है, मजदूरों के ₹500 करोड़ की सहायता रोककर बैठा है। बोर्ड अब उन मजदूरों की पुनः जांच करवा रहा है जिनके फॉर्म चार साल पहले जमा हुए थे। पंचायत सचिव द्वारा जारी रोजगार प्रमाणपत्रों को भी अवैध बताकर उनकी जांच करवाई जा रही है, जो स्वयं ग्रामीण विकास व मनरेगा कानून की प्रक्रिया पर सवाल है। भूपेंद्र ने इसे पूरी तरह गैरकानूनी बताते हुए कहा कि मनरेगा में कार्य करने वालों की उपस्थिति मस्टर रोल में ऑनलाइन होती है, जिसे पंचायत प्रतिनिधि और तकनीकी सहायक प्रमाणित करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड की बैठकों में लिए गए निर्णयों को सचिव लागू नहीं कर रहे, जिससे हजारों मजदूरों की छात्रवृत्ति, बीमारी, दुर्घटना, शादी, पेंशन आदि की सहायता रुकी हुई है। यूनियन इस मुद्दे को उच्च न्यायालय में ले जाने के साथ-साथ सड़क पर विरोध भी तेज करेगी। इसकी रणनीति 26 से 28 अक्तूबर को सोलन में होने वाले सीटू राज्य सम्मेलन में बनाई जाएगी।












