CM सुक्खू का सख्त संदेश: काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं-लापरवाह ठेकेदारों के टेंडर होंगे रद्द
शिमला। शिमला में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-3 (PMGSY-3) के तहत चल रहे निर्माण कार्यों में देरी का मुद्दा विधानसभा में जोरदार तरीके से गूंजा। हैरानी की बात यह रही कि सत्तारूढ़ दल के ही विधायकों ने अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
देहरा से विधायक कमलेश ठाकुर और ज्वालाजी से विधायक संजय रत्न ने प्रश्नकाल के दौरान सड़कों के निर्माण में हो रही सुस्ती और ठेकेदार की कार्यशैली को लेकर सरकार को घेरा। कमलेश ठाकुर ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में मै. गर्ग सन्स बालाजी-ईएनटी (जेवी) फर्म को सड़क निर्माण के कई काम आवंटित किए गए हैं, लेकिन काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। एक साल से धूल और मिट्टी के कारण स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार एक दिन देहरा में काम करता है तो दूसरे दिन शाहपुर चला जाता है, जिससे काम अधूरा ही रह जाता है।
वहीं संजय रत्न ने और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संबंधित फर्म को 26 सड़कों का काम सौंप दिया गया है, जबकि यह फर्म उत्तराखंड में ब्लैकलिस्टेड रह चुकी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार निचले स्तर के कर्मचारियों को डराता है और सीधे उच्च अधिकारियों से संपर्क करता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि फर्म के सभी टेंडर रद्द किए जाएं और भविष्य में ठेके आवंटन के नियमों को सख्त बनाया जाए। साथ ही सुझाव दिया कि बड़े पैकेज को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग ठेकेदारों को दिया जाए, ताकि काम समय पर पूरा हो सके।
इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी सत्तापक्ष के विधायकों का समर्थन किया और कहा कि पूरे प्रदेश में पीएमजीएसवाई के कार्यों में देरी एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
सरकार सख्त, कार्रवाई के संकेत
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि जिन ठेकेदारों ने काम में लापरवाही बरती है, उनके खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन ठेकेदारों ने काम शुरू ही नहीं किया है, उनके टेंडर रद्द करने पर भी विचार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने भविष्य के लिए बड़ा संकेत देते हुए कहा कि अब एक ठेकेदार को एक या दो ही काम दिए जाएंगे और अगला काम तभी मिलेगा जब पहले का कार्य पूरा होगा।
जांच के आदेश, पहले भी लग चुका जुर्माना
इससे पहले लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने जानकारी दी कि देहरा और ज्वालामुखी क्षेत्रों में पीएमजीएसवाई-3 के तहत हो रही देरी की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इसके लिए प्रधान सचिव लोक निर्माण की अगुवाई में एक कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें ईएनसी और कांगड़ा के चीफ इंजीनियर सहित अन्य अधिकारी शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि संबंधित फर्म पर पहले ही 3.22 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। साथ ही कहा कि पीएमजीएसवाई-3 के तहत प्रदेश में करीब 3000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य जारी है, जिसे 31 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए दो साल का अतिरिक्त समय भी दिया है, लेकिन सरकार तय समय में कार्य पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
साफ संदेश: अब देरी बर्दाश्त नहीं
सदन में उठे इस मुद्दे ने साफ कर दिया है कि सरकार अब निर्माण कार्यों में ढिलाई को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में है। आने वाले समय में ठेकेदारों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।












