छिपा हुआ खतरा: नशे से बढ़ रहा हेपेटाइटिस बी और सी का कहर, लापरवाही पड़ सकती है भारी
हेपेटाइटिस छिपा हुआ खतरा... लापरवाही पड़ सकती है भारी
विश्व हेपेटाइटिस दिवस 28 जुलाई को मनाया जाएगा। हेपेटाइटिस बी और सी साइलेंट किलर से कम नहीं है। हैरत की बात तो यह है कि हेपिटाइटिस बी और सी सबसे नशा करने वाले युवाओं में अधिक पाया जा रहा है, क्योंकि एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल होने से यह बीमारी एक से दूसरे में फैल रही है। पिछले साल भी जिला कांगड़ा के नूरपुर क्षेत्र में इस तरह से काफी मामले सामने आए थे। उधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुमित शर्मा ने बताया कि हेपिटाइटिस बी और सी असुरक्षित सुई के बार-बार नशे के लिए इस्तेमाल से बढ़ रहा है। अधिकतर मामले युवाओं में सामने आ रहे हैं। इसके प्रति लोगों में जागरूकता कम है, जो एक चिंता का विषय है। लापरवाही और समय पर जांच न होने के कारण यह वायरल लिवर के कैंसर का कारण बन रहा है। लोग काला पीलिया समझ कर इसे नजर अंदाज करते हैं और जान गंवा रहे हैं। क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण से यकृत में सूजन, सिरोसिस और यकृत कैंसर जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
इस बार का थीम हेपेटाइटिस : चलो इसे तोड़ें
इस दिवस को मनाने का उद्देश्य हेपेटाइटिस जैसी घातक और छिपी हुई बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच और उपचार को प्रोत्साहित करना व वैश्विक स्तर पर इससे होने वाली मौतों को कम करना है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2025 का विषय हेपेटाइटिस : चलो इसे तोड़ें है। इसमें 2030 तक इस बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य है।
जिले में 2023 से अब तक 384 संक्रमित मरीज सामने आए
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में हेपेटाइटिस के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। वर्ष 2023 से लेकर अब तक की अवधि में जिले में हेपेटाइटिस ए, बी, सी और ई के कुल 36,643 टेस्ट किए हैं, जिनमें से 384 लोग संक्रमित पाए गए हैं।
हेपेटाइटिस ए : 685 टेस्ट, 177 पॉजिटिव
हेपेटाइटिस बी : 18,440 टेस्ट, 73 पॉजिटिव
हेपेटाइटिस सी : 15,931 टेस्ट, 122 पॉजिटिव
हेपेटाइटिस ई : 587 टेस्ट, 12 पॉजिटिव
कारण
डॉ. सुमित शर्मा के अुनसार हेपेटाइटिस ए होने का कारण दूषित पानी और खाना है। इसके फैलने का तरीका गंदे पानी से बना भोजन, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना है। इसका शिकार अधिकतर बच्चे और युवा होते हैं। यह बीमारी अकसर अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता हो सकती है।हेपेटाइटिस वी संक्रमित खून या शरीर के तरल पदार्थ के कारण होता है। संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई या ब्लेड का उपयोग, संक्रमित मां से जन्म के समय बच्चे में संक्रमण हो होता है। यह बीमारी लंबे समय तक रह सकती है और लीवर सिरोसिस या लिवर कैंसर तक का कारण बन सकती है। हेपेटाइटिस सी का मुख्य कारण संक्रमित खून है। असुरक्षित इंजेक्शन, संक्रमित खून चढ़ाने से यह फैलता है। इसके लक्षण देर से दिखते हैं, लेकिन यह बीमारी लंबे समय तक लीवर को नुकसान पहुंचाती है। हेपेटाइटिस ई गंदे पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण होता है और गर्भवती महिलाओं में यह जानलेवा हो सकता है।
लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआत में हेपेटाइटिस के लक्षण हल्के हो सकते हैं या नजर नहीं आते। मगर कुछ आम लक्षण हैं जिसमें पीलिया त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब, भूख कम लगना, थकान और कमजोरी, पेट में दर्द या सूजन, उल्टी, मतली, बुखार कभी-कभी लीवर फेल होने की स्थिति भी हो सकती है।
बचाव
हेपेटाइटिस की बीमारी से बचने के लिए स्वच्छ पानी और भोजन करें, हाथ धोने की आदत डालें, टीकाकरण करवाए, असुरक्षित रक्त चढ़ाने से बचें, सुरक्षित यौन संबंध रखें, संक्रमित सुई या ब्लेड का उपयोग न करें। गर्भवती महिलाएं समय पर जांच कराएं। - डॉ. सुमित शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, कागंड़ा












