लैपटॉप की मरम्मत में देरी पर आयोग ने सुनाया फैसला, उपभोक्ता को मिलेगा मुआवजा
थुरल तहसील के हलूं निवासी विजेंद्र कुमार की शिकायत पर जिला उपभोक्ता आयोग ने आसुस कंपनी और उसके अधिकृत सेवा केंद्र के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी और सेवा केंद्र को संयुक्त या अलग-अलग रूप से उपभोक्ता को 10 हजार रुपये का मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमा शुल्क देने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि ग्राहक के लैपटॉप की मरम्मत 30 दिनों के भीतर की जाए अन्यथा कंपनी को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से क्षतिपूर्ति करनी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक से ऑनसाइट सेवा शुल्क के रूप में अधिकतम 550 रुपये और सेवा शुल्क के रूप में अधिकतम 850 रुपये ही वसूल किए जा सकते हैं। यदि कोई पुर्जा बदला जाए तो उसकी वास्तविक कीमत ही ली जा सकेगी। शिकायतकर्ता विजेंद्र कुमार ने आयोग को बताया कि उन्होंने 30 मई 2022 को 45,800 रुपये में आसुस कंपनी का लैपटॉप खरीदा था। 16 फरवरी 2024 को बैटरी खराब हो गई, जिसकी शिकायत उन्होंने अधिकृत सेवा केंद्र एफ-1 इंफोसोल्यूशंस एंड सर्विसेज नादौन को दी। लेकिन शिकायत को बिना समाधान के बंद कर दिया गया। बाद में 21 फरवरी को कंपनी की ओर से ऑनसाइट सेवा के लिए 1500 रुपये शुल्क का कोटेशन भेजा गया, जबकि पहले ग्राहक को 550 रुपये शुल्क बताया गया था। शिकायतकर्ता ने इस विसंगति पर ईमेल के माध्यम से जवाब भी दिया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। बार-बार संपर्क के बावजूद कोई समाधान न मिलने पर विजेंद्र कुमार ने आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर ने सेवा में लापरवाही और अनुचित शुल्क वसूली मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया।












