कांगड़ा में पंचायत पुनर्गठन का विरोध, ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
कांगड़ा: हिमाचल प्रदेश में चुनावी माहौल के बीच कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी में दसमा गांव के ग्रामीण पंचायत पुनर्गठन से नाराज हैं। उन्होंने प्रशासन से अपनी पुरानी पंचायत हिरण में वापस जोड़ने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि फैसले से उन्हें रोजमर्रा के कामों में दिक्कत हो रही है और अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे चुनाव बहिष्कार करने पर मजबूर होंगे।
ग्रामीणों के अनुसार पहले दसमा और चाड़ल ग्राम पंचायत हिरण के अंतर्गत आते थे, लेकिन हाल ही में हुए पुनर्गठन में इन्हें अलग कर ग्राम पंचायत फकलोह के साथ जोड़ दिया गया है। इस बदलाव से लोगों को दैनिक कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हिरण पंचायत घर उनके गांव से मात्र 150 मीटर की दूरी पर है, जबकि फकलोह पंचायत करीब 4 से 5 किलोमीटर दूर पड़ती है। ऐसे में छोटे-छोटे कामों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी हो रही है।
ग्रामीणों ने SDM को सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने उपमंडल अधिकारी (SDM) ज्वालामुखी को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि वार्ड दसमा को दोबारा ग्राम पंचायत हिरण में शामिल किया जाए। पूर्व प्रधान ममता ठाकुर ने कहा कि यह निर्णय बिना स्थानीय जरूरतों को समझे लिया गया है, जिसे तुरंत बदला जाना चाहिए। इस मौके पर रूपलाल, करनैल सिंह, वीरेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, लाल दीन, सुनील कुमार, संगीता रानी, अंजना कुमारी, अनीश कुमार और निशा देवी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में अपनी मांग दोहराते हुए जल्द समाधान की अपील की।
चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे आगामी चुनावों में मतदान नहीं करेंगे। उन्होंने “जीरो वोटिंग” का विकल्प अपनाने की बात कही है, जिससे प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।






