शिमला: पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई के संकेत, CM सुक्खू ने दिया सख्त संदेश
शिमला। हिमाचल प्रदेश में 2022 के पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले ने एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार (4 मई) को साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कार्रवाई तय है।
दरअसल, यह मामला उस समय फिर सुर्खियों में आया जब (CBI) द्वारा अप्रैल 2024 में भेजा गया एक कम्युनिकेशन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस रिपोर्ट में CBI ने चार पुलिस अधिकारियोंजिनमें IPS अधिकारी भी शामिल हैं के खिलाफ “गंभीर पेशेवर चूक, लापरवाही और प्रक्रिया के उल्लंघन” का हवाला देते हुए बड़ी विभागीय सज़ा की सिफारिश की थी।
क्या था पूरा मामला?
साल 2022 में हिमाचल प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के 1,334 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। लेकिन पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई। CBI जांच में खुलासा हुआ कि 19 मार्च 2022 को गाजियाबाद की एक निजी प्रिंटिंग प्रेस में प्रश्न पत्र छपाई के दौरान ही कथित तौर पर चोरी हो गया था।
जांच में सामने आई बड़ी लापरवाहियां
CBI रिपोर्ट में कई गंभीर सुरक्षा खामियों की ओर इशारा किया गया:
प्रिंटिंग प्रेस के चयन में कोई औपचारिक टेंडर या वर्क ऑर्डर नहीं किया गया
संवेदनशील प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती नहीं थी
दस्तावेजों को बिना उचित सीलिंग और रिकॉर्ड के संभाला गया
फाइनल ड्राफ्ट को मंजूरी के लिए WhatsApp के जरिए शेयर किया गया, जिससे गोपनीयता पर सवाल खड़े हुए
सियासी घमासान भी तेज
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दल Bharatiya Janata Party (BJP) ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दोषी अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
CM सुक्खू का जवाब
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा, “हमारी सरकार हर स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। सत्ता में आते ही हमने SIT का गठन किया और अब हमें पता है कि गड़बड़ी कहां हुई। आपसी विवादों से असली मुद्दे से ध्यान नहीं भटकाना चाहिए।”
उन्होंने दोहराया कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार CBI की सिफारिशों पर कब और कैसी कार्रवाई करती है। यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक पारदर्शिता बल्कि भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।






