डॉ. यशवंत सिंह परमार: हिमाचल के निर्माता और विकास के शिल्पकार, पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि
हिमाचल प्रदेश आज जिस पहचान, स्थिरता और विकास के पथ पर अग्रसर है, उसकी नींव रखने वाले व्यक्तित्वों में डॉ. यशवंत सिंह परमार का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्हें केवल एक राजनेता कहना उनके व्यापक योगदान के साथ अन्याय होगा, क्योंकि वे वास्तव में हिमाचल प्रदेश के “निर्माता” और इसके विकास की मजबूत आधारशिला रखने वाले दूरदर्शी शिल्पकार थे। आज ही के दिन 1981 में डॉ. वाई. एस. परमार ने दुनिया को अलविदा किया था।
डॉ. परमार का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा नेतृत्व पद या सत्ता से नहीं, बल्कि दृष्टिकोण और समर्पण से परिभाषित होता है। एक ऐसे समय में जब पहाड़ी क्षेत्रों की राजनीतिक पहचान लगभग नगण्य थी, उन्होंने हिमाचल को एक अलग राज्य के रूप में स्थापित करने का स्वप्न देखा और उसे साकार भी किया। 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक और निर्णायक रही।
उनका मानना था कि विकास का केंद्र केवल शहर नहीं, बल्कि गांव होने चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया। उनकी नीतियों में हिमाचल की कृषि और बागवानी को भी प्राथमिकता दी गई, जिसने आगे चलकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।
विशेष रूप से सेब बागवानी के क्षेत्र में डॉ. परमार की दूरदृष्टि आज भी हिमाचल की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है। उन्होंने पहाड़ी किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जो कदम उठाए, वे आज भी प्रदेश के विकास मॉडल का आधार बने हुए हैं।
डॉ. परमार का राजनीतिक जीवन सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की भावना से परिपूर्ण था। उन्होंने सत्ता को कभी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना, बल्कि इसे जनता की सेवा का माध्यम समझा। यही कारण है कि आज भी उन्हें हिमाचल प्रदेश में गहरी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।
उनकी पुण्यतिथि केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को पुनः आत्मसात करने का अवसर है। आज जब हिमाचल विकास की नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब डॉ. परमार की नीतियाँ और दृष्टिकोण और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
आवश्यकता इस बात की है कि उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए हम हिमाचल को और अधिक आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।
डॉ. यशवंत सिंह परमार को पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन।






