SC का फैसला: अब नहीं रुकेगा कर्मचारियों का हक, कॉन्ट्रैक्ट पीरियड के वरिष्ठता और वित्तीय लाभ होंगे बहाल
हिमाचल प्रदेश सरकार के कर्मचारियों की सेवा शर्तों से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कर्मचारियों को अनुबंध अवधि (कॉन्ट्रैक्ट पीरियड) को सेवा अवधि में शामिल करते हुए वरिष्ठता और वित्तीय लाभ देने के आदेश दिए गए थे।
29 जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई उचित आधार नहीं बनता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा गया है।
सरकार को 4 महीने में लागू करने होंगे आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करने के लिए चार महीने का समय दिया है। अदालत ने माना कि फैसले को लागू करने से राज्य सरकार पर वित्तीय प्रभाव पड़ेगा, इसलिए अनुपालन के लिए उचित समय दिया जाना जरूरी है।
इस फैसले के बाद प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब अनुबंध अवधि को सेवा में शामिल किए जाने से कर्मचारियों को वरिष्ठता, वेतन संबंधी लाभ और अन्य वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा फैसले का असर
गौरतलब है कि हिमाचल हाईकोर्ट ने पहले ही सरकार के उस कानून को रद्द कर दिया था, जिसे कर्मचारियों ने सेवा शर्तों से जुड़े प्रावधानों को लेकर चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि अनुबंध अवधि को सेवा लाभों से अलग नहीं किया जा सकता।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखने के बाद इसका सीधा असर प्रदेश के हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा। कर्मचारियों को जहां लंबे समय से लंबित लाभ मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं सरकार के सामने इसे लागू करने और इससे पड़ने वाले आर्थिक भार को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
आर्थिक बोझ बनेगा बड़ी चुनौती
राज्य की मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों को मिलने वाले अतिरिक्त वित्तीय लाभ सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी साबित हो सकते हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार के पास अब हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
अब सभी की नजरें सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि चार महीने की समय सीमा के भीतर वह कर्मचारियों को यह लाभ किस तरह प्रदान करती है।






