पूर्व CPSs को सरकारी बंगले देने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को जारी किया कारण बताओ नोटिस
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) को सरकारी आवास बनाए रखने की अनुमति देने के राज्य सरकार के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "नियम किसी व्यक्ति का चेहरा देखकर नहीं बनाए जा सकते।" अदालत ने सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि इस निर्णय पर तत्काल रोक क्यों न लगाई जाए। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
कैबिनेट ने 2024 से किया था आवास नियमित
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष पेश की गई मूल सरकारी फाइल से पता चला कि 4 मई 2026 को मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद मंत्रिमंडल ने छह पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों के सरकारी आवासों को 14 नवंबर 2024 से नियमित (Regularize) करने का फैसला लिया था।
खंडपीठ ने इस पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट पहले ही मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्तियों को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर चुका है। ऐसे में इन पूर्व CPS का सरकारी आवासों पर कोई अधिकार नहीं बनता था। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें आवास खाली कराने के बजाय हिमाचल प्रदेश अलॉटमेंट रूल्स, 1994 के नियम-24 के तहत विशेष छूट देते हुए बिना किसी आवेदन के सरकारी आवासों में रहने की अनुमति दे दी और केवल सामान्य लाइसेंस शुल्क ही लिया गया।
'अगर कोर्ट हस्तक्षेप न करता तो मामला दबा दिया जाता'
हाईकोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि अदालत ने स्वतः संज्ञान लेकर नोटिस जारी नहीं किया होता, तो संभवतः यह पूरा मामला सार्वजनिक ही नहीं हो पाता। अदालत ने कहा कि यह निर्णय समानता के अधिकार और प्रशासनिक निष्पक्षता के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होता है तथा सरकारी शक्तियों के मनमाने इस्तेमाल का संकेत देता है।
मुख्य सचिव से मांगे कई अहम जवाब
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामे के माध्यम से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पूछा है कि—
अब तक कितने सरकारी कर्मचारियों या अधिकारियों को बिना आवेदन के इस तरह की विशेष छूट दी गई?
छह पूर्व CPS को नियमों में ढील देकर सरकारी आवास में रहने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
पद समाप्त होने के बाद सरकारी आवास में रहने की अवधि के लिए इन पूर्व CPS पर कितना दंडात्मक (Penal) किराया बनता है?
क्या इस मामले में नियमों का समान रूप से पालन किया गया या विशेष लाभ दिया गया?
19 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा है कि वह स्पष्ट करे कि पूर्व CPS को सरकारी आवास बनाए रखने संबंधी फैसले पर तत्काल रोक क्यों न लगाई जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी, जहां मुख्य सचिव का व्यक्तिगत हलफनामा और सरकार का विस्तृत जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।






