बिजली बोर्ड के कर्मचारी की मौत पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली बोर्ड के एक कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान करंट लगने से हुई मौत के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। अदालत ने इस मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) और रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को नोटिस जारी किए हैं।
यह मामला मृतक बारू राम की पत्नी की ओर से भेजे गए एक प्रतिवेदन के आधार पर हाईकोर्ट के संज्ञान में आया। बारू राम बिजली बोर्ड में इलेक्ट्रीशियन के रूप में कार्यरत थे। 5 जुलाई 2026 को काम के दौरान उनका संपर्क विद्युत प्रवाहित लाइन से हो गया था, जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि बिजली बोर्ड की ओर से प्रस्तुत टिप्पणियों में इस घटना की जिम्मेदारी निजी ठेकेदारों पर डाली जा रही है। इनमें रेल विकास निगम लिमिटेड, उसका संयुक्त उपक्रम ठेकेदार मेसर्स एयरेफ इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड और उप-ठेकेदार मेसर्स निहाल इंफ्राटेक का नाम शामिल है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सुरक्षा मानकों और संबंधित दायित्वों का उचित पालन नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप बारू राम की मृत्यु हुई। खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसी परिस्थितियों में मृतक के परिवार के पास राहत प्राप्त करने का कोई प्रभावी उपाय नहीं बचता दिखाई देता है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर लिया और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत अब यह जानना चाहती है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई, सुरक्षा उपायों का पालन हुआ या नहीं और इस मामले में जिम्मेदारी किसकी बनती है।
मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट के समक्ष उस दिन संबंधित पक्षों की ओर से जवाब प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।






