चंडीगढ़ बस स्टैंड में HRTC की इलेक्ट्रिक बसों को नो एंट्री, परमिट को लेकर मचा विवाद
चंडीगढ़: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की इलेक्ट्रिक बसों को चंडीगढ़ बस स्टैंड में प्रवेश नहीं दिए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि परमिट नहीं होने का हवाला देकर HRTC की इलेक्ट्रिक बसों को बस स्टैंड में रोक दिया गया। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और हिमाचल-चंडीगढ़ बस सेवा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, HRTC की इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों को लेकर चंडीगढ़ पहुंचीं, लेकिन बस स्टैंड परिसर में प्रवेश के दौरान उन्हें रोक दिया गया। संबंधित अधिकारियों की ओर से बसों के पास आवश्यक परमिट नहीं होने की बात कही गई। इसके चलते बसों को निर्धारित बस स्टैंड में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति बनी।
ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा, लेकिन परमिट का पेच
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमाचल सरकार प्रदेश में इलेक्ट्रिक परिवहन को तेजी से बढ़ावा दे रही है। सरकार ने 2026-27 के बजट में 297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की जानकारी दी है, जबकि चरणबद्ध तरीके से 1,000 Type-II इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की योजना भी रखी गई है। ऐसे में प्रदेश की नई इलेक्ट्रिक बसों का दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालन सुचारु रूप से हो, इसके लिए परमिट और अंतरराज्यीय परिवहन से जुड़े नियमों का स्पष्ट होना बेहद जरूरी है।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर HRTC की बसें नियमित रूप से चंडीगढ़ रूट पर संचालित हो रही हैं, तो परमिट को लेकर समस्या पहले क्यों सामने नहीं आई? वहीं, अगर वास्तव में आवश्यक परमिट या अनुमति पूरी नहीं थी, तो यात्रियों को परेशानी से बचाने के लिए संबंधित विभागों के बीच पहले से समन्वय क्यों नहीं किया गया? चंडीगढ़ प्रशासन के परिवहन ढांचे में इंटर-स्टेट बस सेवाओं का संचालन होता है और चंडीगढ़ के सेक्टर-17 तथा सेक्टर-43 में इंटर-स्टेट बस टर्मिनल संचालित हैं।
यात्रियों की परेशानी सबसे बड़ी चिंता
बस को लेकर नियम-कायदे अपनी जगह हैं, लेकिन इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा परेशानी आम यात्रियों को उठानी पड़ सकती है। हिमाचल से चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से हिमाचल रोजाना बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। ऐसे में यदि बसों को बस स्टैंड में प्रवेश नहीं मिलता है या उन्हें बाहर से संचालित करना पड़ता है, तो यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। HRTC की इलेक्ट्रिक बसें हिमाचल के ग्रीन और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ऐसे में अंतरराज्यीय स्तर पर इनके संचालन से जुड़ी प्रशासनिक और परमिट संबंधी अड़चनें जल्द दूर होना जरूरी है।
अब देखना होगा कि HRTC और चंडीगढ़ प्रशासन के बीच इस परमिट विवाद का समाधान कैसे निकलता है और यात्रियों के लिए बस सेवा सामान्य रूप से कब बहाल होती है। फिलहाल चंडीगढ़ बस स्टैंड में HRTC की इलेक्ट्रिक बसों को रोके जाने का मामला हिमाचल और चंडीगढ़ के परिवहन विभागों के बीच समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।






