हिमाचल में बनी 31 दवाएं जांच में फेल, पेनकिलर-एंटीबायोटिक भी शामिल
सोलन: हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी अप्रैल ड्रग अलर्ट में देशभर की 120 दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाई गई हैं, जिनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित 31 दवाएं भी शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें पेनकिलर, एंटीबायोटिक, शुगर, बीपी, खांसी, संक्रमण और पेट की बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार बद्दी, नालागढ़, कालाअंब, पांवटा साहिब, ऊना और सोलन स्थित कई दवा कंपनियों के सैंपल जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे। कुछ दवाएं कंटेंट यूनिफॉर्मिटी, डिसॉल्यूशन टेस्ट और गुणवत्ता संबंधी अन्य मानकों में फेल पाई गईं।
जांच में जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उनमें दर्द निवारक दवाएं, एंटीबायोटिक, संक्रमण रोकने वाली दवाएं, मधुमेह, ब्लड प्रेशर, उल्टी, खांसी और पेट संबंधी दवाएं शामिल हैं। कई कंपनियों को नोटिस जारी कर बाजार से संबंधित बैच वापस मंगवाने के आदेश भी दिए गए हैं।
प्रदेश के फार्मा उद्योगों में लगातार फेल हो रहे सैंपलों ने दवा निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता जांच प्रभावी ढंग से हो रही होती, तो इतनी बड़ी संख्या में खराब दवाएं बाजार तक नहीं पहुंचतीं।
राज्य ड्रग कंट्रोलर के अनुसार संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं और आगे की कार्रवाई प्रक्रिया में है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि दवाएं केवल डॉक्टर की सलाह और अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि हिमाचल प्रदेश देश का बड़ा फार्मा हब माना जाता है। ऐसे में बार-बार दवाओं के सैंपल फेल होने से प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री की साख पर असर पड़ रहा है।






