‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ भारत के लोकतंत्र को नई दिशा देगा : अनुराग ठाकुर
हमीरपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने गुजरात में आयोजित वन नेशन, वन इलेक्शन पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की हितधारक परामर्श बैठक में भाग लिया। सांसद पी. पी. चौधरी की अध्यक्षता में गठित यह समिति देशभर में विभिन्न हितधारकों से संवाद कर रही है। गुजरात प्रवास के दौरान समिति ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, गुजरात विधानसभा अध्यक्ष, वरिष्ठ मंत्रियों, विधायकों, उपाध्यक्ष तथा अन्य हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा की। इस दौरान देश में एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
गुजरात सरकार ने वन नेशन, वन इलेक्शन पहल को पूर्ण समर्थन देते हुए इसे देश के सुशासन और विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि एक साथ चुनाव होने से देश को व्यापक प्रशासनिक और आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे। बैठक में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि, चुनावी खर्च में कमी, प्रशासनिक मशीनरी और सुरक्षा बलों के बेहतर उपयोग, तथा एकीकृत मतदाता सूची तैयार करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही संवैधानिक संशोधनों और सुचारु क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया।
जेपीसी सदस्य के रूप में संबोधित करते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि बार-बार होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव देश की विकास गति पर बड़ा बोझ बनते जा रहे हैं। विभिन्न राज्यों में अलग-अलग समय पर लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता के कारण विकास परियोजनाएं, जनकल्याणकारी योजनाएं और प्रशासनिक कार्य लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव एक साथ कराए जाएं तो सरकारों को लगातार विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा, परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
अनुराग सिंह ठाकुर ने गुजरात सरकार, जनप्रतिनिधियों और सभी हितधारकों का रचनात्मक एवं सकारात्मक सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन केवल चुनावी सुधार नहीं बल्कि सुशासन की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है, जो राजनीतिक और प्रशासनिक संसाधनों की बचत कर उन्हें जनहित में उपयोग करने का अवसर देगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और देशवासियों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करें, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक मानते हैं।






