ऐसे नगर निगम का क्या फायदा, अधिसूचना के 5 माह बाद भी सब कुछ औंधे मुंह, रुक गए निर्माण कार्य
हमीरपुर को नगर निगम का दर्जा मिले अब पांच माह से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन इस दर्जे के नाम पर यहां अभी कुछ भी नहीं है। विकास कार्य लगभग ठप पड़े हैं। वार्ड नए कितने बनने हैं, इस पर भी फिलहाल अजीबोगरीब माहौल है। करोड़ों की राशि के बिल पेमेंट के लिए बजट की इंतजार में है। अब सवाल एक ही है कि नगर परिषद से नगर निगम बनाकर 5 महीनों में यदि कुछ होना ही नहीं था, तो नगर निगम बनाने की जल्दबाजी भी आखिर क्या थी। जब तक नगर परिषद काम करती, काम चला रहता। शहर की दिक्कतों को दूर करने के लिए यहां के नुमाइंदे यानी पार्षद कुछ न कुछ तो करते रहते। अब तो हालत यह हैं कि पार्षद तो हैं, लेकिन नाम के। उनके पास कोई पावर नहीं है, नगर निगम का फट्टा तो टाउन हॉल के उस गेट पर लग गया है, जहां पर पहले नगर परिषद लिखा होता था, लेकिन भीतरी व्यवस्था में कोई खास बदलाव नहीं है। कर्मचारियों का भी यहां पर अच्छा खासा टोटा है। नगर निगम के चुनाव कब होंगे, अभी कोई पता नहीं।
कितने बनने हैं वार्ड, कोई पता नही
नगर परिषद के 11 वार्ड थे, अब जो नई बनावट तैयार हुई है, उसके मुताबिक लगभग 18 वार्ड बनने चाहिएं लेकिन इस पर भी पूर्ण रूप से सहमति नहीं है। कभी खबर मिलती है कि 15 ही बनेंगे, लेकिन फाइनल कब होगी डीलिमिटेशन। इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। जितने भी बनने हैं, बन जाएं। क्योंकि नगर निगम के सदस्यों के चुनाव के लिए इच्छुक लोगों ने विसात भी बिछानी है। इसीलिए अभी यह पता ही नहीं चल पा रहा है कि कितने वार्ड बनेंगे? उनकी स्थिति क्या होगी कौन-कौन से क्षेत्र उसमें शामिल होंगे। वैसे 31 मार्च का समय इसके लिए तय किया गया था, लेकिन वह तो बीत चुका है, अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
जल्द होगी सारी स्थिति क्लियर
हमीरपुर के एडीसी और नगर निगम के प्रशासक अभिषेक गर्ग का कहना है कि कुछ दिनों में सारी स्थिति क्लियर होगी।












