हिमाचल में 387 करोड़ का फर्जी डिग्री घोटाला: ED ने 200 करोड़ की संपत्तियां की अटैच
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से जुड़े बहुचर्चित फर्जी डिग्री घोटाले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब 387 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई, जिसे फर्जी लेन-देन और शेल नेटवर्क के माध्यम से देशभर में चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया गया।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक लगभग 200 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर दी हैं। हाल ही में विशेष पीएमएलए कोर्ट, शिमला ने इन संपत्तियों की जब्ती को वैध ठहराते हुए ईडी की कार्रवाई को मंजूरी दे दी है।
लाखों रुपये में बिकती थीं नकली डिग्रियां
जांच में सामने आया कि सोलन के मानव भारती विश्वविद्यालय से जुड़ा यह घोटाला बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था। एजेंटों और बिचौलियों के माध्यम से छात्रों को लाखों रुपये लेकर नकली डिग्रियां बेची जाती थीं। इस पूरे रैकेट का संचालन राज कुमार राणा, उसकी पत्नी अशोनी कंवर और बेटा मंदीप राणा कर रहे थे।
देशभर में फैला निवेश नेटवर्क
ईडी की जांच में पता चला कि घोटाले से अर्जित रकम को चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेराबस्सी और राजपुरा (पटियाला) सहित कई शहरों में प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया। इन संपत्तियों में रिहायशी प्लॉट, कमर्शियल बिल्डिंग और अन्य निवेश शामिल हैं। हाल ही में ईडी चंडीगढ़ जोनल ऑफिस ने इन ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाकर कई अहम दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन के सबूत भी जुटाए हैं।
एफआईआर से शुरू हुई जांच, मनी लॉन्ड्रिंग तक पहुंचा मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत धर्मपुर पुलिस स्टेशन, सोलन में दर्ज तीन एफआईआर से हुई थी। आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज होने के बाद ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत जांच शुरू की। जांच में यह साफ हुआ कि अवैध कमाई को अलग-अलग खातों और निवेशों के जरिए छिपाने की कोशिश की गई।
मुख्य आरोपी भगोड़ा घोषित
मामले का मुख्य आरोपी मंदीप राणा लगातार जांच से बचता रहा और कई समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुआ। इसके चलते 3 जनवरी 2026 को उसे भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया गया। इसके बाद अदालत ने 23 अप्रैल को उसकी संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जब्त की गई संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से जुड़ी हैं और कानून के तहत इनकी जब्ती पूरी तरह उचित है।
यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह संगठित तरीके से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।












