CBSE स्कूलों में चयनित शिक्षकों की सरकार को दो टूक, बोले- जब मेरिट में आए तो नियुक्ति क्यों नहीं?
शिमला। सीबीएसई सब-कैडर के लिए चयनित सेवारत शिक्षकों ने अपनी नियुक्तियों को लेकर सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रखने की तैयारी शुरू कर दी है। राजकीय टीजीटी कला संघ के प्रदेश महासचिव विजय हीर ने कहा है कि सीबीएसई प्रतिनियुक्ति परीक्षा-2026 उत्तीर्ण कर मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले शिक्षक जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर नियुक्तियां अधिसूचित नियमों के अनुसार केवल मेरिट के आधार पर किए जाने की मांग करेंगे।
विजय हीर ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट पर अभ्यर्थियों को 10 पसंदीदा स्टेशनों के विकल्प भरने की सुविधा दी गई थी, लेकिन बाद में यह विकल्प हटा दिया गया। उनका कहना है कि यदि यह डेटा उपलब्ध रहता तो शिक्षा विभाग को पहले से ही यह स्पष्ट हो जाता कि किस विद्यालय के लिए कितने शिक्षक प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे नियुक्ति और काउंसलिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम बन सकती थी।
उन्होंने सुझाव दिया कि विभाग चयनित शिक्षकों से ऑनलाइन माध्यम से स्टेशन वरीयता विकल्प प्राप्त करे। इससे विभाग को वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी और यह स्पष्ट हो सकेगा कि मेरिट के आधार पर किन विद्यालयों में किन शिक्षकों की नियुक्ति संभव है। साथ ही उन विद्यालयों की स्थिति भी सामने आ जाएगी जहां सीबीएसई सब-कैडर भर्ती नियमों के तहत फिलहाल स्टॉप-गैप व्यवस्था के माध्यम से कार्य जारी रखना होगा।
प्रदेश महासचिव ने कहा कि यदि ऑनलाइन विकल्प लेकर मेरिट आधारित काउंसलिंग करवाई जाती है तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की संभावना भी नहीं रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य चयन आयोग के माध्यम से होने वाली नई भर्तियों में विभिन्न प्रकार के समायोजन किए जाते हैं, लेकिन सेवारत शिक्षकों के मामले में अनावश्यक भ्रम पैदा किया जा रहा है।
विजय हीर ने स्पष्ट कहा कि जिन शिक्षकों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया है और जो सीबीएसई विद्यालयों में सेवाएं देना चाहते हैं, उन्हें अवसर मिलना चाहिए। वहीं जो शिक्षक इस बार चयनित नहीं हो पाए हैं, वे आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर भविष्य में अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि मेरिट सूची में चयनित शिक्षकों को नियुक्ति से वंचित करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। चयनित शिक्षक मुख्यमंत्री के समक्ष अपना पक्ष रखकर न्याय की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय पर उपसमिति के अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से चर्चा हो चुकी है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस मामले का सकारात्मक समाधान निकालेगी।






