हाईकोर्ट की दो बड़ी कार्रवाई: लेक्चरर नियमितीकरण पर रोक, खुली जेलों की निगरानी के निर्देश
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 में नियुक्त डीम्ड अनुबंध लेक्चररों के नियमितीकरण की तिथि से जुड़े 4 अक्तूबर 2024 के एकल पीठ के फैसले के संचालन और क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने वर्ष 2004 में पैरा नीति के तहत नियुक्त सीएंडवी अनुबंध कर्मचारियों की अपील स्वीकार करते हुए सरकार और अन्य पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने अपील दाखिल करने में हुई देरी को भी माफ कर दिया।
यह मामला वर्ष 2004 में पैरा नीति के तहत नियुक्त शिक्षकों और वर्ष 2010 में चयन बोर्ड के माध्यम से नियुक्त लेक्चररों की वरिष्ठता से जुड़ा है। पैरा शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति पहले हुई थी, इसलिए वरिष्ठता सूची में उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अदालत ने प्रथम दृष्टया उनके पक्ष को विचारणीय मानते हुए एकल पीठ के आदेश के अमल पर रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई पहले से लंबित संबंधित अपील के साथ की जाएगी।
वहीं, हाईकोर्ट ने प्रदेश में खुली जेलों (ओपन प्रिजन) के पारदर्शी संचालन, विस्तार और निगरानी के लिए राज्य निगरानी समिति के गठन के निर्देश दिए हैं। समिति योग्य कैदियों की पहचान कर उन्हें सामान्य जेलों से खुली जेलों में स्थानांतरित करने, उनके संचालन की समीक्षा करने और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने का काम करेगी। समिति को हर तीन महीने में हाईकोर्ट के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। पहली रिपोर्ट 21 अगस्त 2026 तक प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार पहले ही इस समिति का गठन कर चुकी है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की गई है।






