मानसून के साथ कांगड़ा जिला में हरियाली अभियान तेज, 60 हजार फलदार पौधे होंगे उपलब्ध, शिवा प्रोजेक्ट के तहत डेढ़ लाख पौधों का रोपण लक्ष्य
मानसून की दस्तक के साथ जिला कांगड़ा में बागवानी गतिविधियां भी रफ्तार पकडऩे लगी हैं। उद्यान विभाग ने इस वर्ष बड़े स्तर पर फलदार पौधों के रोपण की तैयारी पूरी कर ली है। किसानों और बागवानों को उन्नत किस्म के पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ शिवा प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर क्लस्टर आधारित पौधरोपण किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जिले में फल उत्पादन को नई दिशा देना है।
डॉ. अलक्ष पठानिया, उप निदेशक उद्यान विभाग जिला कांगड़ा (धर्मशाला) ने बताया कि बरसात का मौसम कांगड़ा में पौधरोपण का मुख्य सीजन होता है और विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस वर्ष किसानों और बागवानों के लिए करीब 60 हजार फलदार पौधे तैयार किए गए हैं। इनमें आम, लीची, अमरूद, अनार, जामुन तथा नींबू, गलगल और माल्टा सहित विभिन्न सिट्रस प्रजातियों के पौधे शामिल हैं। इन पौधों की बिक्री जल्द शुरू होगी और इन्हें विभाग के ब्लॉक स्तर के कार्यालयों के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के शिवा प्रोजेक्ट के तहत जिला कांगड़ा के 13 ब्लॉकों में इस वर्ष करीब डेढ़ लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के अंतर्गत सिट्रस और अमरूद के साथ पहली बार आम के क्लस्टर भी विकसित किए जाएंगे। फतेहपुर, इंदौरा और नूरपुर क्षेत्रों में किसानों की मांग को देखते हुए अम्रपाली, मल्लिका, पूसा अरुणिमा, अरुणिका, अंबिका और पूसा श्रेष्ठा जैसी उन्नत किस्मों के आम के पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए पौधों की खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और संबंधित नर्सरियों को आपूर्ति आदेश जारी कर दिए गए हैं।
डॉ. पठानिया ने बताया कि सामान्य पौधरोपण कार्यक्रम के तहत इस वर्ष लगभग 40 से 50 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा, जबकि शिवा प्रोजेक्ट के अंतर्गत करीब 140 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया जाएगा। उन्होंने किसानों से मानसून सीजन का लाभ उठाकर विभाग से उन्नत किस्म के फलदार पौधे प्राप्त करने और वैज्ञानिक तरीके से बागवानी अपनाने की अपील की।






