ACPS का लाभ रोकना गैर-कानूनी, हाईकोर्ट ने दिए बकाया भुगतान के आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम (ACPS) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल देरी से दावा करने के आधार पर कर्मचारियों को इस योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि एसीपीएस का लाभ न मिलने से कर्मचारियों को हर महीने वित्तीय नुकसान होता है, इसलिए यह एक निरंतर जारी रहने वाला कारण है।
जस्टिस जिया लाल भारद्वाज की बेंच ने हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं को चार वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद से एसीपीएस के तहत मिलने वाले सभी वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्तमान याचिका दायर होने से तीन वर्ष पूर्व की अवधि से बकाया राशि का भुगतान किया जाए। यदि बैंक तीन माह के भीतर भुगतान नहीं करता है तो उसे बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
अदालत ने बैंक की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि कर्मचारियों ने अपने अधिकार की मांग करने में देरी की। हाईकोर्ट ने माना कि पात्र होने के बावजूद एसीपीएस का लाभ न देना गैर-कानूनी, मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में दिए गए समानता एवं समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता वर्ष 2017 में जूनियर क्लर्क के रूप में नियुक्त हुए थे और 2021 तक बिना पदोन्नति के चार वर्ष की सेवा पूरी कर चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य कर्मचारियों को एसीपीएस का लाभ दिया गया, लेकिन उन्हें इससे वंचित रखा गया। इसी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।






