हिमाचल में निजी स्कूलों पर सख्ती, अब सिर्फ NCERT-SCERT की किताबें ही पढ़ानी होंगी
शिमला। हिमाचल प्रदेश में निजी स्कूलों में निर्धारित पाठ्यपुस्तकों की जगह अन्य प्रकाशकों की किताबें पढ़ाने पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों के उपनिदेशकों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में केवल एनसीईआरटी (NCERT) और एससीईआरटी (SCERT) द्वारा निर्धारित पाठ्यपुस्तकों का ही उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
मानवाधिकार आयोग की शिकायत के बाद कार्रवाई
स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के माध्यम से प्राप्त एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि देश के कई निजी स्कूल निर्धारित पाठ्यपुस्तकों की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। विभाग ने इसे शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की भावना के विपरीत माना है।
निरीक्षण कर भेजनी होगी रिपोर्ट
निदेशालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के सभी निजी स्कूलों के प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को आवश्यक निर्देश जारी करें। साथ ही निजी स्कूलों का निरीक्षण, सर्वेक्षण और लेखा-परीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि कहीं एनसीईआरटी और एससीईआरटी के अलावा अन्य प्रकाशकों की किताबें तो नहीं पढ़ाई जा रहीं। इसकी विस्तृत रिपोर्ट भी विभाग को भेजनी होगी।
दो सप्ताह में भेजनी होगी विद्यार्थियों की जानकारी
शिक्षा विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान नर्सरी से 12वीं कक्षा तक सरकारी और निजी स्कूलों में नामांकित विद्यार्थियों का विवरण दो सप्ताह के भीतर निदेशालय को उपलब्ध कराया जाए।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में निर्धारित पाठ्यपुस्तकों के स्थान पर अन्य प्रकाशकों की किताबें पढ़ाए जाने की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 तथा हिमाचल प्रदेश निजी शैक्षणिक संस्थान (विनियमन) अधिनियम-1997 एवं नियम-2003 के तहत कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में स्कूलों की मान्यता या विभाग द्वारा जारी अनापत्ति/अनुमति प्रमाणपत्र भी रद्द किया जा सकता है।
शिक्षा विभाग के इस कदम का उद्देश्य प्रदेश के सभी स्कूलों में एक समान और निर्धारित पाठ्यक्रम लागू करना तथा विद्यार्थियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करना है।






