जमीनी स्तर पर उतरने जा रही 'अपना परिवार सुखी परिवार योजना', अब कोई गरीब नहीं रहेगा अनदेखा
हिमाचल प्रदेश में पहली बार सरकार कल्याणकारी योजनाएं दफ्तरों में बैठकर नहीं, गरीब परिवारों की चौखट पर पहुंचकर उनकी जरूरतों के आधार पर तैयार करने जा रही है. प्रदेश के करीब 1.78 लाख अति निर्धन परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए शुरू की गई 'अपना परिवार सुखी परिवार योजना' अब जमीनी स्तर पर उतरने जा रही है. इसके पूरे प्रदेश के ब्लॉक स्तर पर तीन दिन तक चलने वाला विशेष जनसंवाद अभियान शुरू हो गया है. जो सभी ब्लॉकों में 8 अगस्त तक चलेगा, जिसमें स्थानीय विधायक स्वयं अति निर्धन परिवारों से सीधे संवाद करेंगे. उनकी वास्तविक समस्याएं, जरूरतें, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, आजीविका और सरकारी योजनाओं से जुड़े अनुभवों का फीडबैक लेंगे, ताकि भविष्य की योजनाएं कागजों पर नहीं, लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाई जा सकें.
अब कोई गरीब नहीं रहेगा अनदेखा
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार ने उन करीब 85 हजार परिवारों को भी चिन्हित किया है जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होने के बावजूद वर्षों तक बीपीएल सूची में शामिल नहीं हो सके. अब ऐसे परिवारों को भी सरकारी योजनाओं के दायरे में लाने की तैयारी है. यही वजह है कि सुक्खू सरकार की यह योजना केवल आर्थिक सहायता देने के साथ इसे सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास का बड़ा अभियान माना जा रहा है.
सरकार का मानना है कि गरीबी की वास्तविक तस्वीर गांवों और परिवारों के बीच जाकर ही समझी जा सकती है. इसलिए पहली बार ब्लॉक स्तर पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और आम लोगों को एक मंच पर लाकर यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर किन कारणों से हजारों परिवार आज भी विकास की मुख्यधारा से पीछे हैं और उन्हें सबसे पहले किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है. इन बैठकों से मिलने वाले सुझावों और फीडबैक के आधार पर सरकार विभिन्न विभागों की योजनाओं में बदलाव करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर नई कल्याणकारी योजनाएं भी तैयार करेगी.
गरीबों की आवाज बनेगी सरकार
प्रदेश की सुक्खू सरकार का दावा है कि, इस पहल का उद्देश्य केवल सहायता राशि देना ही नहीं, इसके साथ अति निर्धन परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना और उनके जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है. ऐसे में शुरू हो रहा यह तीन दिवसीय अभियान हिमाचल में गरीब कल्याण की दिशा में एक नई कार्यशैली की शुरुआत माना जा रहा है, जहां योजनाओं का आधार सरकारी फाइलों से बाहर निकल कर गरीब परिवारों की आवाज बनेगी.
कल्याणकारी योजना होगी तैयारी
हिमाचल प्रदेश में अति निर्धन परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'अपना परिवार, सुखी परिवार' योजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. प्रदेश सरकार ने पंचायत स्तर पर लगातार आठ चरणों में सर्वे कर ऐसे परिवारों की पहचान की है, जो आर्थिक, सामाजिक और आजीविका के लिहाज से सबसे अधिक जरूरतमंद हैं. इन सर्वेक्षणों ने सरकार को पहली बार ऐसा विस्तृत डाटाबेस भी उपलब्ध कराया है, जिसके आधार पर आने वाले समय में नई कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी. यही वजह है कि सरकार अब केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं रहना चाहती, इन परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने, सरकारी योजनाओं से जोड़ने और स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
सात चरणों तक पंचायतों से 2,38,125 आवेदन प्राप्त
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सात चरणों तक प्रदेश की विभिन्न पंचायतों से 2,38,125 आवेदन प्राप्त हुए थे. इनमें तय मानदंडों के आधार पर 1,20,011 परिवारों को अति निर्धन श्रेणी में चिन्हित किया गया. इसके बाद शुरू किए गए आठवें चरण में सर्वे का दायरा और बढ़ाया गया, जिससे चिन्हित परिवारों की संख्या बढ़कर करीब 1.78 लाख के करीब तक पहुंच गई है. ऐसे में आठवें चरण के बाद तैयार हुआ यह आंकड़ा प्रदेश में वास्तविक जरूरतमंद परिवारों की पहचान का सबसे बड़ा आधार बनेगा.
यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो पहले चरण में 21,144 परिवार, दूसरे चरण में 21,547 परिवार, तीसरे चरण में 11,997 परिवार, चौथे चरण में 14,746 परिवार, पांचवें चरण में 17,692 परिवार, छठे चरण में 17,241 परिवार तथा सातवें चरण में 9,644 परिवारों को अति निर्धन सूची में शामिल किया गया. इसके बाद आठवें चरण के सर्वे ने इस संख्या को बढ़ाकर लगभग 1.78 लाख तक पहुंचा दिया.
अब सरकार की नजर 'अपना परिवार, सुखी परिवार' संवाद कार्यक्रम पर है. प्रदेशभर में चल रहे इस संवाद अभियान के दौरान अति निर्धन परिवारों से सीधे बातचीत कर उनकी वास्तविक जरूरतों, समस्याओं और सुझावों को दर्ज किया जा रहा है. ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के सचिव सी पाल रासू का कहना है संवाद कार्यक्रम समाप्त होने के बाद इन्हीं परिवारों की मांग और जरूरत के अनुरूप नई कल्याणकारी योजनाएं तैयार की जाएंगी, ताकि जरूरतमंद परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव लाया जा सके.






