हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रोजगार कार्यालय में नाम दर्ज कराने से नहीं मिलेगा सीधी भर्ती का अधिकार
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पीईटी शिक्षक भर्ती मामले में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि रोजगार कार्यालय में नाम दर्ज कराने या पंजीकरण कराने मात्र से किसी उम्मीदवार को सीधी भर्ती का अधिकार नहीं मिल जाता। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने नौ याचिकाकर्ताओं की अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा।
कोर्ट ने पाया कि शिक्षा विभाग ने वर्ष 1997 के बाद फिजिकल एजुकेशन डिप्लोमा धारकों की नियमित सीधी भर्ती नहीं की, जबकि पीटीए और पैरा-टीचर नीतियों के तहत नियुक्तियां होती रहीं। शारीरिक शिक्षकों के 1527 पदों के कैडर में सीधी भर्ती का कोटा 25 प्रतिशत यानी 382 पद है, लेकिन सरकार पहले ही इस कोटे से अधिक 645 नियुक्तियां कर चुकी है। ऐसे में सीधी भर्ती के लिए पद उपलब्ध नहीं हैं।
याचिकाकर्ताओं ने अपने से जूनियर लोगों की नियुक्ति का हवाला देकर समानता के आधार पर नौकरी की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि जिन कर्मचारियों का उदाहरण दिया गया है, उनकी सेवाएं विशेष सरकारी नीति के तहत सहायता प्राप्त स्कूलों से ली गई थीं, इसलिए याचिकाकर्ता उस आधार पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि नियमों के तहत कानूनी अधिकार नहीं बनने पर अदालत सीधी भर्ती का आदेश नहीं दे सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीटीए और पैरा-टीचरों के नियमितीकरण से सीधी भर्ती का कोटा पहले ही निर्धारित सीमा से अधिक हो चुका है।






