सरकाघाट नगर परिषद का बड़ा खेल! अनसेफ घोषित दुकानें फिर भी जारी कारोबार, सरकारी खजाने को लगी डेढ़ करोड़ की चोट
अनंत ज्ञान, सरकाघाट।
मंडी जिले के सरकाघाट नगर परिषद का वर्षों पुराना शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अब बड़े विवाद और सवालों के घेरे में आ गया है। करीब साढ़े चार साल पहले इस दो मंजिला भवन की 26 दुकानों को असुरक्षित घोषित कर उनसे किराया वसूली बंद कर दी गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक अधिकांश दुकानदार वहीं कारोबार कर रहे हैं। इस पूरे मामले में नगर परिषद को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ा है और अब यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार इन दुकानों से नगर परिषद को पहले हर महीने करीब ढाई लाख रुपये किराया मिलता था। दुकानों को “अनसेफ” घोषित करने के बाद किराया वसूली रोक दी गई, जिससे अब तक सरकार को लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब भवन और भूमि संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं थीं, तो दुकानों का किराया माफ करने का फैसला आखिर किस आधार पर लिया गया। बताया जा रहा है कि जिस भूमि पर यह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बना हुआ है, वह आज भी लोक निर्माण विभाग (PWD) के नाम दर्ज है। इसके बावजूद नगर परिषद सदन ने भवन को असुरक्षित घोषित कर किराया माफी का प्रस्ताव पारित कर दिया था।
1992 में बना था कॉम्प्लेक्स
मुख्य बाजार स्थित यह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स वर्ष 1992 में बनाया गया था। इसी भवन में नगर परिषद कार्यालय भी संचालित होता था। वर्ष 2020 के आसपास भवन को जर्जर और खतरनाक बताते हुए नगर परिषद कार्यालय को अन्य स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया तथा दुकानदारों को दुकानें खाली करने के नोटिस जारी किए गए।
हालांकि, चार साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अधिकतर दुकानदार अब तक दुकानें खाली नहीं कर पाए हैं और भवन में कारोबार जारी है। यही नहीं, जिस भवन को खतरनाक घोषित किया गया, उसकी छत पर बड़े-बड़े विज्ञापन होर्डिंग्स लगाने की अनुमति भी दी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भवन वास्तव में असुरक्षित है, तो उस पर भारी होर्डिंग्स लगाने की अनुमति देना लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। तेज आंधी या तूफान की स्थिति में ये होर्डिंग्स कभी भी बड़ा हादसा पैदा कर सकते हैं।
क्या बोले पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष
नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष कश्मीर सिंह ने कहा कि भवन की खराब हालत को देखते हुए सदन ने दुकानों को अनसेफ घोषित करने का फैसला लिया था। उन्होंने बताया कि दुकानदारों को तीन कानूनी नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। उनका कहना है कि चुनाव आचार संहिता के कारण कार्रवाई में देरी हुई, अन्यथा भवन को पहले ही गिरा दिया जाता।
जांच की जाएगी : ईओ
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि जर्जर भवन पर लगाए गए होर्डिंग्स की जांच करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि दुकानदारों से शपथ पत्र लिए गए हैं कि किसी भी हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी उनकी स्वयं की होगी।
ईओ के अनुसार भूमि नगर परिषद के नाम ट्रांसफर होने और आवश्यक एनओसी मिलने के बाद पुराने भवन को गिराकर वहां नया चार मंजिला आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। साथ ही दुकानदारों को अंतिम नोटिस जारी कर दुकानें खाली करवाने की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
फिलहाल यह मामला नगर परिषद की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक फैसलों और सरकारी राजस्व के नुकसान को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सरकाघाट नगर परिषद का यह मामला केवल एक जर्जर भवन या किराया विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक फैसलों, जवाबदेही और सरकारी राजस्व के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक तरफ भवन को असुरक्षित घोषित कर किराया वसूली बंद कर दी गई, वहीं दूसरी ओर उसी भवन में वर्षों तक कारोबार चलता रहा और होर्डिंग्स लगाने की अनुमति भी मिलती रही।
यदि भवन वास्तव में खतरनाक था, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और यदि इतना खतरनाक नहीं था तो सरकार को करोड़ों के नुकसान की स्थिति क्यों बनने दी गई यही सबसे बड़ा सवाल है। अब जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों और फैसलों की समीक्षा की जाए तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए स्पष्ट नीति तैयार की जाए।
सरकारी संपत्ति और जनता के पैसे के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही ही किसी भी व्यवस्था की सबसे बड़ी कसौटी होती है।






