एक साल पहले जंगल में लगी थी आग, विभाग ने मार्किंग के बाद भी नहीं काटे 1000 से ज्यादा सूखे पेड
बड़सर उपमंडल के जठुंडा के जंगल में पिछले साल आग से जले 1000 से ज्यादा पेड़ अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। आग लगने से ये पेड़ सूख चुके हैं, जिससे सड़क से गुजरने वालों पर इनकी टहनियां अंधड़ से जगह-जगह गिर रही हैं। तेज हवा से इन सूखे पेड़ों के गिरने का भी खतरा बराबर बना हुआ है। जंगल में बनी सड़क से सैकड़ों वाहन हर रोज गुजरते हैं। ऐसे में अगर अंधड़ ने विकराल रूप लिया, तो लोगों की जान भी जा सकती है। इलाके के लोगों ने विभाग से इन पेड़ों को काटने की मांग की है। बता दें कि पिछले साल गर्मियों में यह पूरा जंगल भयंकर आग की चपेट में आकर जल गया था। तब लगता नहीं था कि इसका कोई सूखा पेड़ अब हरा भरा हो पाएगा, लेकिन पिछली बरसात के बाद कुछ पेड़ों में जान आ गई। कुछ पेड़ दोबारा हरे-भरे भी हो गए, लेकिन ज्यादातर पेड़ अभी भी सूखे हैं।
बदसूरत हुआ जंगल
जंगल में करीब 4000 छोटे-बड़े चीड़ के पेड़ हैं। ज्यादातर हिस्सा जल गया था, अब देखने में यह जंगल बदसूरत लगता है। इसके अलावा वाहन चालकों को भी दुर्घटना का भय सताता रहता है।
विभाग नहीं कर रहा कोई गौर
परेशान लोगों का कहना है कि सड़क के किनारे जितने भी सूखे पेड़ हैं, विभाग को उन्हें तत्काल कटवा देना चाहिए, ताकि हर समय व्यस्त रहने वाले इस रोड पर वाहन चालकों को इनके अचानक गिरने के डर से छुटकारा मिल सके। ऐसा इसलिए क्योंकि तूफान के समय यहां से गुजरना खतरे से खाली नहीं होता। छोटी-मोटी टहनियां तो गिरती ही रहती हैं। सेवानिवृत्त जोगिंद्र कायथ का कहना है कि विभाग के ध्यान में यह समस्या लाई गई है, लेकिन अभी हल नहीं हुआ है। उनका भी आग्रह है कि इस पर विभाग गौर करे।
बरसात के बाद भी हरे नहीं होने पर वन निगम को सौंपेंगे: रेंज ऑफिसर
मैहरे में स्थित रेंज ऑफिसर मुनीम शर्मा का कहना है कि समस्या ध्यान में है, लेकिन दिक्कत यह है कि कुछ पेड़ फिर से हरे-भरे हो गए थे। आग की चपेट में आने के बाद एक बरसात का सीजन पेड़ों को दोबारा हरा-भरा होने के लिए देखना चाहिए। अब इस बरसात के बाद जो पेड़ सूखे हैं, उनकी मार्किंग की जाएगी और वन निगम को सौंप दिए जाएंगे।












