धर्मशाला में श्रमिकों का जोरदार प्रदर्शन: लंबित क्लेमों को लेकर सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, उग्र आंदोलन की चेतावनी
धर्मशाला में शुक्रवार को जिला भर के श्रमिकों ने कचहरी अड्डा में प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने लंबित पड़े विभिन्न क्लेमों के निपटारे में हो रही देरी पर गहरा आक्रोश जताया। श्रमिकों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही क्लेम का निपटारा नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने प्रदेश सरकार पर गंभीर अनदेखी के आरोप लगाए। ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर के राज्य महासचिव रविंद्र सिंह के नेतृत्व में पहुंचे श्रमिकों ने कहा कि उनके क्लेमों पर लगातार तरह-तरह के ऑब्जेक्शन लगाए जा रहे हैं, जिससे पात्र लाभार्थी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण कामगारों को मिलने वाली सहायता राशि पिछले लगभग तीन वर्षों से लंबित पड़ी है।
श्रमिकों का आरोप है कि भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड द्वारा छात्रवृत्ति, विवाह सहायता, विकलांगता सहायता, चिकित्सा सहायता और मृत्यु पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लगभग ठप पड़ी हैं। कई पात्र आवेदनों पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जबकि आवेदन दफ्तरों में धूल फांक रहे हैं।
ज्ञापन सौंपने के बावजूद नहीं हुई सुनवाई
राज्य महासचिव रविंद्र सिंह ने कहा कि श्रमिकों द्वारा बार-बार ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जिन मृत्यु एवं छात्रवृत्ति क्लेम को मंजूरी मिल चुकी थी, उनकी राशि आज तक लाभार्थियों के बैंक खातों में नहीं पहुंची है। इससे श्रमिकों में गहरा असंतोष बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मजदूरों का धैर्य अब टूटने की कगार पर है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सरकार पर लगाया मजदूर विरोधी रवैये का आरोप
रविंद्र सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से प्रदेश सरकार ने मजदूर विरोधी रवैया अपना रखा है। औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद लगातार ऑब्जेक्शन लगाकर लाभ रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत में खोट है और मजदूरों को उनका हक नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि मजदूर लगातार लेबर दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि अधिकारी उन्हें सिर्फ आश्वासन देकर टाल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड में करीब 1400 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध होने के बावजूद क्लेमों का निपटारा नहीं किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें छह माह के भीतर श्रमिकों के क्लेम निपटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है।












