चेस्टर हिल्स विवाद में बड़ा पलटवार: पूर्व RERA चीफ बालदी ने चीफ सेक्रेटरी को ठहराया जिम्मेदार
शिमला/सोलन: हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट विवाद में अब पूर्व रेरा अध्यक्ष श्रीकांत बालदी ने अपना पक्ष रखते हुए बड़ा बयान दिया है। बालदी ने अपने कार्यकाल का बचाव करते हुए पूरे मामले की जिम्मेदारी प्रशासनिक स्तर पर डालते हुए सीधे तौर पर मुख्य सचिव संजय गुप्ता और संबंधित विभागों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
क्या बोले श्रीकांत बालदी?
पूर्व रेरा प्रमुख ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट के संबंध में कोई लंबित शिकायत नहीं थी और जो भी निरीक्षण किया गया, उसमें निर्माण गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विवादित फेज-II और फेज-IV उस समय अस्तित्व में ही नहीं थे, इसलिए उन पर सवाल उठाना उचित नहीं है। बाद में शिकायतें मिलने पर रेरा ने कार्रवाई करते हुए डेवलपर्स पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
जिम्मेदारी किसकी?
बालदी का कहना है कि रेरा केवल प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन करता है, जबकि जमीन से जुड़े मामलों और कानूनों के पालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और राज्य सरकार के विभागों की होती है।
दरअसल, रेरा ने भी अपने बचाव में कहा है कि प्रोजेक्ट की मंजूरी विभिन्न विभागों से मिलने वाले दस्तावेजों के आधार पर दी जाती है और यह अन्य विभागों के अधिकार क्षेत्र को ओवरराइड नहीं करता।
विवाद की जड़ क्या है?
चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट पर आरोप है कि इसमें हिमाचल के भूमि कानून (Section 118) का उल्लंघन हुआ और गैर-हिमाचलियों को जमीन ट्रांसफर की गई।
मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने पहले रेरा से इस मामले में “wilful inaction” (जानबूझकर निष्क्रियता) पर जवाब मांगा था और पूर्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे।
अब टकराव तेज
- एक तरफ मुख्य सचिव जांच और जवाबदेही की बात कर रहे हैं
- वहीं पूर्व रेरा अध्यक्ष बालदी अपने फैसलों को सही ठहरा रहे हैं
- दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से मामला अब प्रशासनिक टकराव में बदलता दिख रहा है
आगे क्या?
राज्य सरकार पहले ही इस पूरे मामले की जांच के निर्देश दे चुकी है। अब देखना होगा कि जांच में किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है—रेरा, जिला प्रशासन या उच्च स्तर के अधिकारी।












