हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, निलंबन से पहले कारण बताओ नोटिस जरूरी नहीं
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के निलंबन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को निलंबित करने से पहले कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करना अनिवार्य नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि निलंबन अपने आप में कोई सजा नहीं माना जा सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने रवि नामक याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि निलंबन आदेश को केवल इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि कर्मचारी को पहले कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया।
मामले में याचिकाकर्ता ने अपने निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए दावा किया था कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उसका कहना था कि आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन भुगतान की जिम्मेदारी उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं थी। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि विभाग ने निलंबन से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया।
हालांकि हाईकोर्ट ने साफ किया कि यह वह चरण नहीं है, जहां अदालत विभागीय कार्यवाही के तथ्यों या आरोपों की सत्यता पर विचार करे। अदालत ने कहा कि यदि अनुशासनात्मक प्राधिकारी आवश्यक समझे तो विभागीय जांच आगे बढ़ाई जा सकती है और निलंबन उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
न्यायालय ने अपने आदेश में दोहराया कि स्थापित कानून के अनुसार निलंबन को दंड की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसलिए निलंबन से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को सरकारी कर्मचारियों और विभागीय अनुशासनात्मक मामलों के लिए अहम माना जा रहा है।






